जीतू पटवारी का सिंधिया पर बड़ा हमला, बोले- महल का बिजली बिल गरीबों की झोपड़ी से भी कम क्यों आ रहा है?
Friday, Oct 16, 2026-03:17 PM (IST)
भोपाल। मध्य प्रदेश में बिजली की कथित किल्लत और बढ़ते बिजली बिलों को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी निशाने पर लिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहे बिलों के बोझ को लेकर तीखी टिप्पणी की।
सिंधिया के महल के बिजली बिल पर पटवारी का तंज
जीतू पटवारी ने सिंधिया के महल के बिजली बिल की तुलना गरीब परिवारों के बिजली बिलों से करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि महल का बिजली बिल गरीबों की झोपड़ियों के बिल से भी कम आया है। पटवारी ने आरोप लगाया कि एक ओर आम लोगों को हजारों और लाखों रुपये तक के बिजली बिलों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में बिजली की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की इस टिप्पणी ने बिजली संकट को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। हालांकि, महल के बिजली बिल से जुड़ा दावा पटवारी के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ऊर्जा मंत्री को लेकर भी उठाए सवाल
पटवारी ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिजली की समस्याओं से परेशान लोग मंत्री को तलाश रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता मंत्री की तस्वीर लेकर उन्हें ढूंढने की स्थिति में है।
उनका आरोप है कि ग्रामीण इलाकों में बिजली की समस्या इतनी गंभीर है कि जब जनप्रतिनिधि और सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ता खुद इन परिस्थितियों को देखते हैं, तो उन्हें भी असहज होना पड़ता है। कांग्रेस ने इसे सरकार के बिजली व्यवस्था संबंधी दावों और जमीनी हालात के बीच अंतर का मुद्दा बनाया है।
दिल्ली मेट्रो को बिजली देने पर सरकार से सवाल
जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश में बिजली की उपलब्धता और उसके वितरण को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई गांवों में लंबे समय तक बिजली नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि ग्रामीण उपभोक्ताओं और किसानों को पर्याप्त बिजली क्यों नहीं मिल पा रही है। उन्होंने दिल्ली मेट्रो को बिजली बेचे जाने का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि जब प्रदेश से बाहर बिजली की आपूर्ति की जा रही है, तो राज्य के गांवों में अंधेरे की शिकायतें क्यों बनी हुई हैं।
बिजली संकट बना राजनीतिक टकराव का मुद्दा
मध्य प्रदेश में बिजली आपूर्ति, उपभोक्ताओं को मिलने वाले बिल और किसानों की जरूरतों को लेकर अब सियासी बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस इन मुद्दों के जरिए सरकार को घेर रही है, जबकि बिजली संकट की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए क्षेत्रवार आपूर्ति, कटौती और बिलों से संबंधित आधिकारिक आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल, जीतू पटवारी के बयानों ने बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया और बिजली आपूर्ति की स्थिति पर सबकी नजर रहेगी।

