दिल्ली-बेंगलुरू के बाद MP के इस शहर में होते हैं सबसे ज्यादा Accident, टू व्हीलर एक्सीडेंट में तो नंबर वन, हैरान कर देंगे ये आंकड़े
Saturday, Aug 30, 2025-01:47 PM (IST)

भोपाल: मध्य प्रदेश में सरकार लगातार सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए अलग-अलग अभियान चलाती रही है, लेकिन ताज़ा सरकारी आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, टू-व्हीलर एक्सीडेंट में जबलपुर देश में पहले स्थान पर है। वहीं, कुल सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में यह शहर देशभर में तीसरे नंबर पर दर्ज किया गया है।
टू-व्हीलर हादसों में अव्वल
रिपोर्ट के मुताबिक, 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सबसे ज्यादा टू-व्हीलर दुर्घटनाएं जबलपुर में हुई हैं। यहां साल 2023 में कुल 2619 सड़क हादसों में टू-व्हीलर शामिल रहे। इन दुर्घटनाओं में 301 लोगों की मौत हुई जबकि 2527 लोग घायल हुए।
सड़क हादसों में तीसरे नंबर पर
साल 2023 में जबलपुर में कुल 4205 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। यह आंकड़ा मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों से भी अधिक है। सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में जबलपुर केवल दिल्ली और बेंगलुरु से पीछे है।
सेफ्टी डिवाइस न होना बड़ा कारण
ड़क हादसों का एक बड़ा कारण टू-व्हीलर में जरूरी सेफ्टी डिवाइस का न होना माना जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी। मोटर व्हीकल एक्ट और सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं के अनुसार, टू-व्हीलर वाहनों में ये तीन सेफ्टी डिवाइस अनिवार्य हैं –
- पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए पकड़ने का हैंडल
- वाहन के पहियों पर आधा कवर
- फुटरेस्ट
हाईकोर्ट ने बिना सेफ्टी डिवाइस वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी 2018 में कंपनियों की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बावजूद आज भी कंपनियां नियमों का पालन नहीं कर रहीं।
ट्रैफिक नियमों की अनदेखी भी वजह
ट्रैफिक नियमों की अनदेखी भी हादसों का प्रमुख कारण है। एएसपी अंजना तिवारी का कहना है कि नागरिक यातायात नियमों के प्रति गंभीर नहीं हैं। हेलमेट पहनने जैसे अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया जाता। लोगों का यह लापरवाह रवैया सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या का बड़ा कारण है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जबलपुर में सड़क पर टू-व्हीलर चालकों की सुरक्षा बेहद चिंताजनक स्थिति में है। सवाल यह है कि जब तक ट्रैफिक नियमों का पालन और वाहन कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक क्या हादसों की संख्या कम हो पाएगी?