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बालों से पुलिस के लपेटे में आए दुष्कर्म और मर्डर के आरोपी, मां-बेटी को हैवानियत के बाद उतारा था मौत के घाट

Monday, Oct 12, 2026-06:03 PM (IST)

सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में मां-बेटी की हत्या और दुष्कर्म के चर्चित मामले में चस्मदीद गवाह नहीं होने के बावजूद सिर के बालों की डीएनए जांच, अंगुलियों के निशान और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चार आरोपियों को दोषी ठहराया है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 51 गवाहों के बयान और वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए फैसला सुनाया।

जानकारी के मुताबिक, अदालत में प्रस्तुत आरोपपत्र के अनुसार, वारदात के बाद घटनास्थल से एकत्र किए गए जैविक नमूने जांच में महत्वपूर्ण साबित हुए। पुलिस ने घटनास्थल यानी रसोई से इंसानी बाल बरामद किए थे। डीएनए जांच में इन नमूनों का आरोपियों से मिलान होने की बात सामने आई। इसके अतिरिक्त मृतका के कपड़ों और घटनास्थल से प्राप्त खून के धब्बों सहित अन्य जैविक नमूनों की जांच से भी अभियोजन पक्ष को महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य मिले। जांच के दौरान पुलिसकर्मी के मकान की सीढ़ियों की रेलिंग से मिले अंगुलियों के निशानों का परीक्षण कराया गया। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, ये निशान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के अंगुलियों के निशानों से मेल खाते थे। पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने के लिए कॉल डिटेल सहित अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया। आरोपपत्र के मुताबिक, मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर जिलाबदर किया गया था। इसके बावजूद वह सूरजपुर शहर में मौजूद था। घटना की रात पुलिस की जांच टीम पर खौलता तेल फेंकने और भागते समय गोली चलाने का भी उस पर आरोप था। जांच में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, पुलिसकर्मी से पुरानी रंजिश के चलते कुलदीप अपने साथियों के साथ उसके घर पहुंचा था, जहां मां-बेटी की हत्या और दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उसका आरोप था कि घटना वाले दिन पुलिस ने उसे हिरासत में रखकर उसके खून, स्पर्म, उंगलियों और हथेली के निशान तथा बालों के नमूने लिए थे। उसने इन नमूनों के आधार पर उसे झूठे मामले में फंसाने का दावा किया। हालांकि, अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। इसी प्रकार आरोपी फूल सिंह उर्फ रिंकू ने घटना के समय दुर्गा विसर्जन कार्यक्रम में मौजूद होने का दावा करते हुए फोटो और वीडियो प्रस्तुत किए। वहीं, चंद्रकांत ने अपने खिलाफ बरामद कपड़ों को पुलिस द्वारा रखे जाने का आरोप लगाया। अदालत ने बचाव पक्ष की इन दलीलों पर विचार करने के बाद अभियोजन के साक्ष्यों को महत्व दिया। इस प्रकरण में कुल छह लोगों को आरोपी बनाया गया था।

अभियोजन पक्ष की ओर से 51 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और फॉरेंसिक जांच से संबंधित रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी गई। चार आरोपियों के विरुद्ध वैज्ञानिक एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध हुए। वहीं, सूरज साहू के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने उसे दोषमुक्त कर दिया। उपलब्ध विवरण में छठे आरोपी के संबंध में अंतिम न्यायिक निर्णय की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस मामले की विशेषता यह रही कि वारदात का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह सामने नहीं आया था। इसके बावजूद घटनास्थल से मिले बाल, रेलिंग पर मौजूद अंगुलियों के निशान, कपड़ों पर खून के धब्बे, डीएनए प्रोफाइलिंग और कॉल डिटेल जैसे परिस्थितिजन्य एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोषियों की भूमिका निर्धारित की। फास्ट ट्रैक अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेज छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर भेजे गए हैं। कानून के अनुसार, मृत्युदंड के क्रियान्वयन से पहले उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक है। इस बीच, मामले के तीन आरोपी वर्तमान में रायपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं। जेल में उन्हें अलग-अलग बैरकों में रखा गया है। अब मृत्युदंड की पुष्टि संबंधी कार्यवाही उच्च न्यायालय में होनी है।


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Content Writer

meena

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