ग्वालियर में अंबेडकर पोस्टर विवाद ने लिया नया मोड़, दलित नेता मकरंद बौद्ध गिरफ्तार

Monday, Jan 05, 2026-08:23 PM (IST)

ग्वालियर : ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़े पोस्टर विवाद में अब घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में एडवोकेट अनिल मिश्रा पर क्राइम ब्रांच में दर्ज एफआईआर के फरियादी दलित नेता मकरंद बौद्ध को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। खास बात यह रही कि गिरफ्तारी उसी वक्त हुई, जब वह इसी केस के सिलसिले में विश्वविद्यालय थाने पहुंचे थे।

पुराने मामले में वारंट बना गिरफ्तारी की वजह

पुलिस के मुताबिक मकरंद बौद्ध के खिलाफ वर्ष 2016-17 में आईपीसी की धारा 188 और 146 के तहत मामला दर्ज था। इस केस में वह लगातार कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था, जिसके चलते उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। विश्वविद्यालय थाना पहुंचने के दौरान जब थाना प्रभारी रविन्द्र कुमार को इस वारंट की जानकारी मिली, तो तत्काल पुलिस टीम को वारंट की तामील के निर्देश दिए गए।

कोर्ट में पेशी के बाद जेल वारंट

पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद मकरंद बौद्ध को कोर्ट में पेश किया, जहां से अदालत ने उसका जेल वारंट जारी कर दिया। इसके साथ ही दलित नेता को जेल भेज दिया गया। मकरंद बौद्ध के जेल जाने के बाद आंबेडकर पोस्टर विवाद में अब दोनों पक्षों के लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुलिस की ‘संतुलन रणनीति’ पर चर्चा

दलित नेता की गिरफ्तारी के बाद शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कुछ लोग इसे पुलिस की ओर से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनाई गई सोची-समझी रणनीति बता रहे हैं। वहीं दलित संगठनों का आरोप है कि मकरंद बौद्ध की गिरफ्तारी पुलिस की साजिश का हिस्सा है और यह कार्रवाई दबाव में की गई है।

क्या है आंबेडकर पोस्टर विवाद

ग्वालियर में बीते कुछ समय से संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर दो पक्ष आमने-सामने हैं। एक पक्ष पर आंबेडकर विरोधी गतिविधियों का आरोप है, जबकि दूसरा पक्ष उनके समर्थन में अभियान चला रहा है। बुधवार को आंबेडकर जैसे पोस्टर जलाने का मामला सामने आने के बाद मकरंद बौद्ध ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत सात लोगों पर मामला दर्ज किया गया।

पहले भी हुई थी गिरफ्तारी

इस केस में गुरुवार रात पुलिस ने एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। रविवार को कोर्ट में सुनवाई भी हुई, जहां न्यायाधीश ने पीड़ित पक्ष को सुनवाई का अधिकार अनिवार्य बताया था। अब फरियादी की गिरफ्तारी के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है, जिस पर सभी की नजरें पुलिस और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

meena

Related News