किसानों के खातों में सीधे आएंगे पैसे, भावांतर योजना से मिलेगा बड़ा फायदा
Friday, Jan 16, 2026-01:23 PM (IST)
MP News: मध्यप्रदेश सरकार किसानों को राहत देने के लिए लगातार कदम उठा रही है। सोयाबीन के बाद अब सरसों की फसल पर भी भावांतर भुगतान योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत जिले के एक लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलने की तैयारी है। यदि मंडी में सरसों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे जाते हैं, तो अंतर की राशि सरकार सीधे किसानों के बैंक खातों में डालेगी।
लक्ष्य से ज्यादा बोवनी, सरसों का रकबा बढ़ा
इस बार जिले में सरसों की खेती ने नया रिकॉर्ड बनाया है। जहां प्रशासन ने 72 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया था, वहीं किसानों ने 89 हजार 537 हेक्टेयर में सरसों की बोवनी कर दी। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में करीब 29 हजार हेक्टेयर अधिक है। पिछले साल जहां 60 हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती हुई थी, वहीं इस बार रकबा और उत्पादन दोनों में इजाफा हुआ है।
MSP से ज्यादा दाम, फिर भी भावांतर पर नजर
सरकार ने सरसों का MSP 6200 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। फिलहाल मंडियों में सरसों के भाव 6400 से 6800 रुपए तक चल रहे हैं। ऐसे में किसानों को अभी भावांतर योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा।
हालांकि किसानों का कहना है कि फरवरी में बंपर आवक के दौरान दाम गिरने की पूरी संभावना है, तब भावांतर योजना किसानों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
किसानों की संख्या भी बढ़ी
सरसों की खेती के साथ-साथ किसानों की संख्या में भी बड़ा उछाल आया है।
पिछले साल: 70 हजार किसान
इस साल: करीब 1 लाख किसान
अगर बाजार भाव MSP से नीचे गए तो इतनी बड़ी संख्या में किसानों को सरकारी सहायता मिलेगी।
भावांतर भुगतान में देरी से किसान परेशान
सरकार ने दो माह पहले सोयाबीन पर भी भावांतर योजना लागू की थी। जिले में 3300 किसानों ने पंजीयन कराया, लेकिन इनमें से 30 किसानों का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है।
इसको लेकर किसानों में नाराजगी है। मंडी सचिव रामकुमार शर्मा का कहना है कि जिन किसानों के बैंक खातों में तकनीकी दिक्कत है, उन्हीं का भुगतान रुका है, बाकी सभी किसानों को राशि भेजी जा चुकी है।
किसानों की नजर अब फरवरी पर
अब सबकी निगाहें फरवरी महीने पर टिकी हैं। अगर सरसों की आवक बढ़ते ही बाजार भाव गिरे, तो भावांतर योजना के जरिए सरकार किसानों को बड़ा सहारा देगी। वहीं यदि दाम MSP से ऊपर रहे, तो यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी।

