चुनावी जीत के खुमार में डूबी BJP भूल गई संगठन विस्तार,खंडेलवाल को पद संभाले हुए 11 महीने
Monday, Jun 15, 2026-05:37 PM (IST)
(भोपाल): मध्य प्रदेस में भाजपा लगातार चुनावी जीत की खुशियां मना रही है। पहले बंगाल चुनाव की जीत का उत्सव फिर राज्यसभा की तीसरी सीट की जीत का जश्न भाजपा मना रही है। हालांकि भाजपा जीत के दावे तो कर रही है लेकिन संगठनात्मक गतिविधियों मे पिछड़ रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडलेवाल को पद संभाले हुए करीब 11 महीने हो गए है लेकिन अभी तक प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। इसके साथ ही कार्यकाल की पहली प्रदेश कार्यसमिति बैठक भी अब तक आयोजित नहीं हो सकी है,जिससे बड़ा सवाल उठ रहा है। वैसे पार्टी के संविधान में हर तीन महीने में कार्यसमिति की बैठक आयोजित करने का प्रावधान है लेकिन ये नहीं पा रहा है।
दरअसल भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक मोर्चे पर अपेक्षा के अनुरुप गति नहीं पकड़ पा रही है। वैसे राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावों में व्यस्तता के चलते संगठनात्मक विस्तार के साथ ही नियुक्तियों की प्रक्रिया पीछे रह गई है।
लगातार टल रहा संगठन विस्तार
दरअसल लगातार चुनावों के चलते भाजपा नेता देश के कई राज्यों में रणनीति में व्यस्त रहे। पहले बिहार विधानसभा चुनाव, फिर पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों के साथ ही प्रचार अभियान ने संगठन का पूरा ध्यान अपनी ओर खींचा । इसके बाद राज्यसभा चुनाव का दौर शुरू हो गया और पार्टी को इसमें बिजी होना पड़ा। राज्यसभा चुनाव में मिली सफलता का पार्टी जश्न मना रही है और अब प्रदेश कार्यकारिणी गठन का मामला फिर पीछे चला गया है।
किया जा रहा कार्यसमिति बैठक का इंतजार
हालांकि भाजपा संगठन में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को नीतिगत दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा मंच माना जाता है। और हेमंत खंडेलवाल की पहली कार्यसमिति बैठक ओरछा में होनी है, लेकिन कार्यकारिणी का गठन न होने के कारण बैठक की तारीख तय नहीं हो सकी है। वहीं अब पार्टी के कई नेता मानने लगे है कि कार्यसमिति गठन में हो रही देरी से संगठन के भीतर निर्णय प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ रहा है।
वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो प्रदेश कार्यकारिणी के साथ ही भाजपा के युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा और पिछड़ा वर्ग मोर्चा में भी प्रदेश कार्यकारिणी अभी घोषित नहीं हुई है। लिहाजा अब भाजपा पर जल्द से जल्द प्रदेश कार्यकारिणी को घोषित करने का दवाब है।

