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BJP का ‘युवा’ मोर्चा या ‘अधेड़’ मोर्चा? 35 साल के ऊपर दर्जनों पदाधिकारियों की नियुक्ति, गाइडलाइन गई तेल लेने!

Saturday, Apr 11, 2026-01:34 PM (IST)

भोपाल : मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के युवा मोर्चा को लेकर इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। आमतौर पर युवा मोर्चा का उद्देश्य पार्टी में नए और युवा चेहरों को अवसर देना होता है, लेकिन हाल ही में बनी टीम को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। श्याम टेलर की टीम में आधे से ज्यादा नेता अधेड़ आयु के हैं। इससे युवा नेतृत्व के अवसर सीमित होते नजर आ रहे हैं।

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भाजयुमो की नई टीम को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि इस टीम में ज्यादातर लोग 35 से ज्यादा आयु के हैं। कुछ एक पर आपराधिक मामले दर्ज है तो कइयों को एक से अधिक पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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देखें सूची

1. विप्लव जैन (रतलाम) प्रदेश महामंत्री - इनके पास चार पद है। जिला योजना समिति में , भाजपा युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अभी 1 महीने पहले ही बने और अब युवा मोर्चा प्रदेश महामंत्री।
2. जय सूर्या (धार) प्रदेश उपाध्यक्ष – इनके खिलाफ धार जिले के बदनावर थाने में आठ मुकदमे दर्ज है। बताया जा रहा है कि इनका गुंडा लिस्ट में भी नाम है। इनका विरोध राजवर्धन सिंह दत्तीगांव पूर्व मंत्री कर रहे हैं।
3. अनिल वर्मा (उज्जैन ग्रामीण) प्रदेश उपाध्यक्ष - उम्र 40 से 42 वर्ष
5. विवेक शर्मा (इंदौर) प्रदेश उपाध्यक्ष - उम्र 38 वर्ष
6. श्रुति सिंह (भोपाल) प्रदेश मंत्री - उम्र 36 वर्ष से अधिक
7. शोभित नाथ शर्मा (भोपाल) प्रदेश मीडिया प्रभारी - उम्र 37 वर्ष से अधिक
8. दीपेश यादव (भोपाल) प्रदेश सह मीडिया प्रभारी - उम्र 39 वर्ष
9. विनय जांगिड़ (मदसौर) प्रशिक्षण सह प्रभारी - उम्र 38 वर्ष
10. जय रोहाणी (जबलपुर) नीति एवं शोध प्रभारी - उम्र 38 वर्ष
11. आयुष कोठारी (नीमच) नमो ऐप पभारी - उम्र 38 वर्ष
12. कपिल शर्मा (भोपाल) फिट इंडिया सह प्रभारी - उम्र 36 वर्ष से अधिक
13. भारतेश बंसल (अशोकनगर) लीगल कलेक्ट सह प्रभारी - उम्र 37 वर्ष स अधिक
14. रेव सिंह भाबर (धार) जनजातीय संपर्क प्रभारी - उम्र 40 वर्ष
15. रवि शर्मा (भोपाल) सोशल मीडिया प्रभारी - उम्र 36 वर्ष से अधिक
 

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उम्र सीमा पर उठे सवाल

भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के गठन की मूल भावना युवाओं को नेतृत्व में आगे लाना है। आमतौर पर इस संगठन में 35 वर्ष तक के कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन हाल ही में घोषित टीम में कई ऐसे पदाधिकारी शामिल किए गए हैं जिनकी उम्र 35 वर्ष से अधिक बताई जा रही है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या संगठन अपनी ही गाइडलाइन से भटक रहा है, या फिर अनुभव को प्राथमिकता देने के लिए नियमों को अनदेखा किया गया है।

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राजनीतिक संदेश और संगठनात्मक रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुभवी नेताओं को शामिल करने से भले ही संगठनात्मक मजबूती बढ़ सकती है, लेकिन इससे युवा कार्यकर्ताओं में असंतोष भी पैदा होने की संभावना रहती है।

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आम चर्चा और संभावित असर

मध्य प्रदेश में इस मुद्दे पर आम चर्चा यह है कि क्या युवा मोर्चा अपने मूल उद्देश्य से दूर जा रहा है। कई कार्यकर्ता इसे “युवा” की बजाय “अधेड़” मोर्चा कहकर व्यंग्य भी कर रहे हैं। यदि यह असंतोष बढ़ता है, तो इसका असर संगठन की जमीनी सक्रियता और आगामी चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। वहीं, पार्टी नेतृत्व के लिए यह एक संकेत हो सकता है कि भविष्य में संतुलन बनाना जरूरी होगा—ताकि युवा और अनुभवी दोनों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

 


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Content Writer

meena

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