MP में भाजपा कार्यकर्ताओं की ‘लॉटरी’, मिलेगी अहम जिम्मेदारियां, इस आधार पर तैयार होगी सूची
Tuesday, May 05, 2026-03:57 PM (IST)
भोपाल : मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए अब एक बड़ा अवसर सामने आता दिख रहा है। दो दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद जमीनी कार्यकर्ताओं को अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिल पाई थी, लेकिन अब मोहन यादव सरकार इस स्थिति को बदलने की तैयारी में है।
कार्यकर्ताओं को मिलेगा प्रतिनिधित्व
मुख्यमंत्री मोहन यादव की विशेष रुचि के चलते जिला स्तर पर विभिन्न समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पार्टी संगठन ने सभी विधायकों से नाम मांगे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस बार आम कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारियां दी जाएंगी। इससे संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश नजर आती है।
संगठन की सक्रिय भूमिका
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सभी जिला इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द योग्य कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करें। इसी क्रम में स्थानीय स्तर पर नेताओं और कोर कमेटी से भी नाम मांगे गए हैं। एक सप्ताह के भीतर सूची तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि नियुक्तियों की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
पहले बड़े नेताओं को मिली प्राथमिकता
सरकार बनने के बाद से ही निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है। इसमें कई वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां दी जा चुकी हैं, जबकि कुछ नियुक्तियां अभी लंबित हैं। जहां विवाद की स्थिति है, वहां समाधान के बाद घोषणा की जाएगी।
25 से अधिक समितियों में अवसर
जिला स्तर पर बनने वाली इन समितियों में आरटीओ, उद्यानिकी, जेल विजिटर बोर्ड, पशु कल्याण, मत्स्य, शहरी विकास, शिक्षा, खाद्य, योजना, उद्योग, खेल, जल व स्वच्छता, खनिज निधि और अन्य कई विभाग शामिल हैं। कुल मिलाकर करीब 25 समितियों में नियुक्तियां होंगी, जिससे बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को मौका मिल सकता है।
इनमें से कई समितियां पहले उमा भारती के मुख्यमंत्री कार्यकाल में बनाई गई थीं, जबकि शिवराज सिंह चौहान के समय कुछ समितियों का गठन हुआ था। हालांकि, पहले कई बार नाम मांगे जाने के बावजूद घोषणाएं नहीं हो पाई थीं।
क्या बदलेगा इस बार?
इस बार संकेत मिल रहे हैं कि सरकार और संगठन दोनों स्तर पर समन्वय बनाकर नियुक्तियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। अगर ऐसा होता है, तो पहली बार बड़ी संख्या में जमीनी कार्यकर्ताओं को सत्ता संरचना में भागीदारी मिल सकती है—जो भाजपा के लिए संगठनात्मक मजबूती का अहम कदम साबित हो सकता है।

