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कहीं FIR तो कहीं पुराने विवादों की चर्चा, MP में भाजयुमो की नियुक्तियों ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें! इन चेहरों को लेकर उठे सवाल

Monday, Nov 02, 2026-08:57 PM (IST)

भोपाल : मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के युवा संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) में जिला अध्यक्षों और महामंत्रियों की नियुक्तियों के बाद विवादों का सिलसिला शुरू हो गया है। 29 अक्टूबर को 19 जिलों में पदाधिकारियों की नियुक्तियों की घोषणा के बाद कई नवनियुक्त पदाधिकारी अलग-अलग मामलों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। कहीं पारिवारिक विवाद में एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है, तो कहीं पुराने संगठनात्मक फैसलों और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन घटनाक्रमों ने भाजपा के संगठनात्मक चयन और उसके घोषित आदर्शों को लेकर बहस छेड़ दी है।

बालाघाट और मंडला में शिकायतों से बढ़ी चर्चा

बालाघाट में नवनियुक्त जिला अध्यक्ष अमन गांधी की भाभी ने मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, मंडला में जिला अध्यक्ष उत्कर्ष यादव की पत्नी ने दहेज में थार गाड़ी की मांग को लेकर प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। इन मामलों के सामने आने के बाद युवा मोर्चा की नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। 

नर्मदापुरम में पुराने निष्कासन पर सवाल

नर्मदापुरम में कुलदीप रघुवंशी को जिला अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके पुराने संगठनात्मक विवाद की चर्चा शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि उन्हें पहले छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि, रघुवंशी का दावा है कि वे पुराने मामले में दोषमुक्त हो चुके हैं और पार्टी में उनकी वापसी भी हो गई थी। लेकिन सवाल फिर वहीं कि उसी चेहरे को क्यों जिम्मेदारी सौंपी गई। 

सिवनी और इंदौर ग्रामीण में भी उठे सवाल

सिवनी में योगेश शिवहरे की नियुक्ति को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि संगठन की पहले से तैयार सूची को दरकिनार किया गया। वहीं, इंदौर ग्रामीण में लगातार तीसरी बार एक ही समाज से जिला अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठ रहा है। इन मामलों ने संगठन में चयन के मानदंडों और विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की प्रक्रिया पर बहस को हवा दी है।

सागर में पुराने आयकर छापे की चर्चा

सागर में नवनियुक्त जिला अध्यक्ष जसवंत राठौर की नियुक्ति के बाद उनके परिवार से जुड़े पुराने आयकर छापे का मामला भी चर्चा में है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में उनके खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई नहीं हुई थी। 

भाजपा के चयन मानदंडों पर सवाल

इन घटनाक्रमों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि युवा मोर्चा में पदाधिकारियों के चयन के दौरान किन मानदंडों को प्राथमिकता दी गई। संगठनात्मक अनुभव, कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता, सामाजिक प्रतिनिधित्व और सार्वजनिक आचरण जैसे पहलुओं को चयन प्रक्रिया में कितनी अहमियत मिली? भाजपा लंबे समय से अपने ‘चाल, चरित्र और चेहरे’ को राजनीतिक पहचान के रूप में प्रस्तुत करती रही है। ऐसे में युवा संगठन की नियुक्तियों के बाद सामने आए विवाद पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं। 
 


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Content Writer

meena

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