राज्य में कैबिनेट फेरबदल की चर्चा तेज, इन मंत्रियों के नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा!
Saturday, Sep 05, 2026-05:27 PM (IST)
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कैबिनेट में बदलाव को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। फिलहाल सरकार या भाजपा संगठन की ओर से मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन प्रदेश भाजपा संगठन में संभावित बदलाव और केंद्र में मंत्रिमंडल को लेकर चल रही अटकलों के बीच राज्य की राजनीति में भी नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि आने वाले समय में सरकार के कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं। कुछ विभागों का पुनर्वितरण हो सकता है और जरूरत पड़ने पर नए चेहरों को भी मौका दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, अभी इन चर्चाओं को सिर्फ राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
प्रदेश भाजपा में बदलाव से जुड़ रही कैबिनेट की चर्चा
मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं को भाजपा के प्रदेश संगठन में संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी बीच केंद्र में भी मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
इसी कड़ी में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू को लेकर भी अटकलें सामने आ रही हैं। चर्चा यह है कि पार्टी संगठन में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। ऐसी स्थिति बनती है तो छत्तीसगढ़ से किसी दूसरे सांसद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की संभावना पर भी राजनीतिक चर्चा हो रही है। हालांकि, इन संभावनाओं की फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बदलाव हुआ तो सामाजिक समीकरण भी होंगे अहम
साय सरकार की कैबिनेट में फेरबदल सिर्फ मंत्रियों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन भी महत्वपूर्ण फैक्टर हो सकता है। यही वजह है कि संभावित बदलाव को लेकर अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को लेकर भी सियासी गणित लगाया जा रहा है। मौजूदा कैबिनेट में आदिवासी, ओबीसी, अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग को प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। ऐसे में यदि कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदली जाती हैं या नए चेहरे शामिल किए जाते हैं तो पार्टी को सामाजिक संतुलन साधने के लिए नए समीकरण तैयार करने पड़ सकते हैं।
ओबीसी प्रतिनिधित्व सबसे ज्यादा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली 14 सदस्यीय कैबिनेट में ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव के अलावा लखन देवांगन, श्यामबिहारी जायसवाल, ओपी चौधरी, टंकराम वर्मा, गजेन्द्र यादव और लक्ष्मी राजवाड़े ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आदिवासी वर्ग से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ रामविचार नेताम और केदार कश्यप शामिल हैं। अनुसूचित जाति वर्ग से दयालदास बघेल और गुरु खुशवंत साहब को जगह मिली है। वहीं सामान्य वर्ग से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और राजेश अग्रवाल कैबिनेट का हिस्सा हैं। यानी अगर कैबिनेट विस्तार या फेरबदल होता है तो सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा सामाजिक संतुलन को बनाए रखने की होगी।
क्षेत्रीय समीकरण भी बन सकते हैं निर्णायक
कैबिनेट के संभावित बदलाव में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व भी चर्चा का बड़ा विषय है। मौजूदा मंत्रिमंडल में रायगढ़, सरगुजा, कोरबा, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, रायपुर और बस्तर जैसे क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। दूसरी ओर कांकेर और महासमुंद लोकसभा क्षेत्रों से फिलहाल मंत्रिमंडल में कोई चेहरा नहीं है। इसलिए यदि पार्टी कैबिनेट में बदलाव के जरिए क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश करती है, तो इन इलाकों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं स्वाभाविक रूप से तेज हो सकती हैं।
किन चेहरों पर सबसे ज्यादा नजर?
संभावित फेरबदल की चर्चा में कई नाम अलग-अलग कारणों से सामने आ रहे हैं। दोनों उपमुख्यमंत्रियों के पदों को लेकर फिलहाल किसी बड़े बदलाव की चर्चा नहीं मानी जा रही। वहीं वरिष्ठता और सरकार में अनुभव के लिहाज से रामविचार नेताम और केदार कश्यप को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
नई पारी में शामिल हुए गुरु खुशवंत साहब, राजेश अग्रवाल और गजेन्द्र यादव जैसे चेहरों को भी सामाजिक एवं क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इसी तरह ओपी चौधरी और श्यामबिहारी जायसवाल की मौजूदा भूमिका को लेकर भी ज्यादा बदलाव की चर्चा फिलहाल नहीं है।
इसके उलट लखन देवांगन, टंकराम वर्मा और लक्ष्मी राजवाड़े के नामों को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें सुनाई दे रही हैं। वरिष्ठ नेता दयालदास बघेल का नाम भी चर्चा में आता है, लेकिन वे दुर्ग क्षेत्र के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि होने के साथ एससी वर्ग के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। इसलिए उनके संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।
क्या बदलेगा ओबीसी का सियासी गणित?
फेरबदल की चर्चाओं में सबसे दिलचस्प पहलू सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर है। राजनीतिक हलकों में एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि भविष्य में कैबिनेट का संतुलन कुछ इस तरह बदला जाए, जिससे सामान्य, आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सके।
इसी कड़ी में महासमुंद को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। रायपुर क्षेत्र के सामाजिक समीकरण को लेकर भी अलग-अलग संभावनाओं पर चर्चा है। हालांकि, यह पूरा गणित अभी राजनीतिक चर्चाओं तक ही सीमित है।
अभी फैसला नहीं, सिर्फ सियासी चर्चा
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि साय मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर न तो राज्य सरकार ने कोई आधिकारिक घोषणा की है और न ही भाजपा संगठन ने संभावित बदलाव का कोई स्पष्ट खाका सामने रखा है। ऐसे में किस मंत्री की जिम्मेदारी बदलेगी, किसे नई भूमिका मिलेगी या किस चेहरे की कैबिनेट से विदाई होगी—इन सवालों का जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है। राजनीति में संगठनात्मक बदलाव के साथ सत्ता के समीकरण बदलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब तक पार्टी नेतृत्व की ओर से अंतिम फैसला सामने नहीं आता, तब तक मंत्रिमंडल में फेरबदल से जुड़ी हर चर्चा को कयास ही माना जाएगा। फिलहाल छत्तीसगढ़ की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर बदलाव हुआ, तो साय कैबिनेट में किसका कद बढ़ेगा और किसकी कुर्सी जाएगी?

