'धान खरीदी को भ्रष्टाचार का माध्यम बना लिया' कांग्रेस अध्यक्ष का सरकार पर तीखा हमला, की ये मांगे
Thursday, Jan 22, 2026-03:05 PM (IST)
रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह) : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राजीव भवन में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए सरकार और भाजपा को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने धान खरीदी की तिथि बढ़ाने, धान खरीदी में भ्रष्टाचार, मनरेगा, जमीनों की गाइडलाइन की दरों को लेकर भाजपा को कटघरे में खड़ा किया।
- धान खरीदी में अब एक हफ्ते का समय शेष है। सरकार ने धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी घोषित किया है। उसमें सिर्फ 9 दिन बचे है। उसमें भी 4 दिन अवकाश रहेगा (24, 25, 26, 31 जनवरी) को छुट्टियां है। सिर्फ 5 दिन और खरीदी होगी।
- सरकार ने ऑनलाइन टोकन काटना बंद कर दिया है। ऑफ लाइन भी टोकन नहीं काटा जा रहा है।
- अभी तक 5.5 लाख किसान धान नहीं बेच पाये है। लगभग 4.7 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है।
- अभी तक मात्र 115 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है कुल लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन है। पांच दिन में 50 लाख टन की खरीदी संभव नहीं, अतः लक्ष्य की प्राप्ति के लिये भी तिथि बढ़ाया जाना आवश्यक है। अभी सरकार के ही द्वारा तय लक्ष्य का 30 प्रतिशत खरीदी बाकी है।
- कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि धान खरीदी की तिथि 1 माह बढाई जाये।
- ऑनलाइन टोकन काटने की बंद प्रक्रिया फिर शुरू की जाए तथा सभी सोसायटियों में ऑफलाइन टोकन देना भी शुरू किया जाये।
- सरकार यह सुनिश्चित करें कि प्रदेश के हर किसान का दाना-दाना धान सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदी की जायेगी।
- किसानों को धान बेचने से रोकने बिना सहमति जबरिया रकबा सरेंडर करवा दिया गया। पूर्व से जारी टोकन को निरस्त करवाया गया। हजारो किसान सरकार के इस षडयंत्र का शिकार हुए।
धान खरीदी सरकार के भ्रष्टाचार का बड़ा माध्यम बना है
- समर्थन मूल्य में उपार्जित धान की सुरक्षा और रखरखाव का उत्तरदायित्व राज्य सरकार का होता है, राज्य गठन के बाद से आज तक इतनी अव्यवस्था और बदइंतजामी कभी नहीं रही जो इस सरकार की उपेक्षा और भ्रष्टाचार से एक हजार 37 करोड़ 55 लाख का नुकसान एक ही साल की खरीदी में हो चुका है, रोज रोज नए नए मामले लगातार उजागर हो रहे हैं।
- पिछले वर्ष के धान का निराकरण सरकार नहीं कर पाई है। धान संग्रहण केन्द्रों में पड़े-पड़े सड़ रहे है, भीग गया, चूहे खा रहे, दीमक लग कर खराब हो गया। प्रदेश के अनेको संग्रहण केन्द्रों में सड़े हुये धान का भंडारण दिख जायेगा। धान के खराब होने और सडने के नाम पर पूरे प्रदेश में सुनियोजित भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
- पिछले खरीद वर्ष में पूरे प्रदेश में 25 लाख 93 हजार 880 क्विंटल धान की मिलिंग ही नहीं करवाई थी, उक्त धान में से 4 लाख 16 हजार 410 क्विंटल धान विभिन्न खरीदी केंद्रों में बताया गया है तथा शेष 21 लाख 77 हजार 470 क्विंटल धान राज्य सहकारी विपणन संघ के विभिन्न संग्रहण केंद्रों में शेष बताया, अब षडयंत्र पूर्वक धीरे धीरे नष्ट होना बता रहे। इसी के आधार पर बड़ा घोटाला किया जा रहा है।
- सरकार की लापरवाही के चलते बस्तर के विभिन्न धान संग्रहण केन्द्रों में 1 लाख क्विंटल से अधिक धान सड़ गया है। यह केवल लापरवाही या चूक नहीं बल्कि सत्ता के संरक्षण में किया जाने वाला अपराध है।
सरकार किसानों का पूरा भुगतान नहीं कर रही
सरकार किसानों को धान की पूरी कीमत नहीं दे रही है। भाजपा ने 2023 में वादा किया था कि किसानों को 3100 रू. प्रति क्विंटल में धान खरीदेगी। भाजपा की सरकार बनने के बाद दो सालों में धान के समर्थन मूल्य में 186 रू. की बढ़ोत्तरी हुई। भाजपा सरकार किसानों को इस बढ़ोत्तरी को जोड़कर 3286 रू. में भुगतान करें। प्रति एकड़ 21 क्विंटल के हिसाब से सरकार प्रति एकड़ किसानों को 3906 रू. भी नहीं दे रही है। इस तरह से लगभग 6500 करोड़ छत्तीसगढ़ के किसानों के हक का नहीं दे रही है यह सरकार।

