मुश्किल वक्त में कांग्रेस छोड़ BJP में गए थे नेता, अब लौटना चाहते हैं वापस; घर वापसी की राह में रोड़ा!
Wednesday, Oct 28, 2026-04:08 PM (IST)
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में पार्टी छोड़कर जा चुके नेताओं की वापसी का मुद्दा अब संगठन के भीतर असहमति की वजह बनता नजर आ रहा है। कांग्रेस के ‘घर वापसी’ अभियान को लेकर पार्टी में अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। एक ओर प्रदेश नेतृत्व पुराने नेताओं को वापस लाने की पहल कर रहा है, तो दूसरी ओर जिलों के पदाधिकारी ऐसे नेताओं की वापसी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इस विरोध ने कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
हाल ही में हुई संभागीय बैठकों में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। बताया जा रहा है कि कई जिलों के पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में शामिल हुए नेताओं को दोबारा कांग्रेस में शामिल करने पर आपत्ति जताई। इनमें पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके नेताओं की वापसी का विषय भी शामिल है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे विरोध से साफ है कि घर वापसी को लेकर पार्टी के भीतर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।
पुराने नेताओं की वापसी पर क्यों बढ़ रहा विरोध?
विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कई नेताओं और पदाधिकारियों ने पार्टी से दूरी बना ली थी। इनमें से कुछ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। अब इन नेताओं को वापस लाने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू होने के साथ ही संगठन के भीतर सवाल उठने लगे हैं। विरोध करने वाले पदाधिकारियों की चिंता यह है कि पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को दोबारा शामिल करने से पहले स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावनाओं और संगठन के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। ऐसे नेताओं की वापसी का फैसला यदि बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के लिया जाता है, तो लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हो सकता है।
इसी वजह से घर वापसी की प्रक्रिया को लेकर जिला स्तर पर सहमति बनाना प्रदेश नेतृत्व के लिए अहम हो गया है। हालांकि, सभी नेताओं की वापसी पर अंतिम फैसला क्या होगा, यह संगठन के निर्णय पर निर्भर करेगा।
जीतू पटवारी की पहल के सामने संगठनात्मक चुनौती
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हाल ही में पार्टी छोड़कर गए नेताओं की घर वापसी के लिए अभियान चलाने की बात कही थी। इस पहल को संगठन को मजबूत करने और पुराने नेताओं को फिर से साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
लेकिन संभागीय बैठकों और जिला अध्यक्षों व प्रभारियों की बैठक में सामने आए विरोध ने इस योजना के सामने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सवाल यह है कि प्रदेश नेतृत्व घर वापसी के अभियान को आगे बढ़ाने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाता है और विरोध कर रहे स्थानीय पदाधिकारियों की चिंताओं का समाधान कैसे करता है।
पार्टी के सामने एक तरफ अनुभवी नेताओं को दोबारा जोड़ने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ उन कार्यकर्ताओं का भरोसा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है, जो मुश्किल राजनीतिक परिस्थितियों में संगठन के साथ खड़े रहे हैं।
क्या अभियान की रफ्तार पड़ सकती है धीमी?
मध्य प्रदेश कांग्रेस में घर वापसी को लेकर उठे विरोध ने इस पहल के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जिला स्तर पर असहमति बनी रहती है, तो पार्टी नेतृत्व को नेताओं की वापसी के लिए स्पष्ट मापदंड तय करने पड़ सकते हैं।
फिलहाल, अभियान पर रोक लगने को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। लेकिन इतना जरूर है कि घर वापसी का रास्ता अब केवल प्रदेश नेतृत्व की घोषणा से तय नहीं होगा। स्थानीय संगठन की सहमति, पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी और राजनीतिक परिस्थितियां इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है, इस पर नजर रहेगी। पार्टी के लिए असली चुनौती केवल पुराने नेताओं को वापस लाने की नहीं, बल्कि संगठन के भीतर एकजुटता बनाए रखने की भी होगी।

