MP कांग्रेस में BJP से लौटने वालों पर लागू होगा नया फॉर्मूला, पहले देना होगा ये सियासी इम्तिहान
Thursday, Oct 22, 2026-08:05 PM (IST)
भोपाल : मध्यप्रदेश में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में वापसी की राह देख रहे नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि अब पार्टी छोड़कर बीजेपी में जाने वाले नेताओं को दोबारा शामिल करने के लिए आसान रास्ता नहीं मिलेगा। घर वापसी से पहले नेताओं को जिला स्तर पर जांच-परख की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यानी अब सीधे एंट्री के बजाय स्थानीय संगठन की सहमति अहम होगी।
जिला समन्वय समिति करेगी फैसला
कांग्रेस के नए रुख के मुताबिक, बीजेपी से कांग्रेस में लौटने के इच्छुक नेताओं के नाम सबसे पहले जिला समन्वय समिति के सामने रखे जाएंगे। समिति संबंधित नेता की राजनीतिक पृष्ठभूमि, कांग्रेस छोड़ने की वजह और अब वापस आने की इच्छा के कारणों पर विचार करेगी। यदि समिति सर्वसम्मति से सहमति देती है, तो प्रस्ताव आगे भोपाल भेजा जाएगा। वहीं, समिति की ओर से आपत्ति होने पर वापसी की राह मुश्किल हो सकती है।
जबलपुर कांग्रेस नगर अध्यक्ष शौरभ नाटी शर्मा के मुताबिक, किसी भी नेता की वापसी पर फैसला लेने से पहले यह देखा जाएगा कि वह किन परिस्थितियों में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गया था और अब किन वजहों से लौटना चाहता है। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
स्थानीय संगठन की सहमति जरूरी
कांग्रेस के इस रुख से साफ है कि पार्टी अब दलबदल करके वापस आने वाले नेताओं के मामले में स्थानीय संगठन की राय को प्राथमिकता देना चाहती है। जिला समन्वय समिति की बैठक में चर्चा के बाद ही संबंधित नामों को अंतिम निर्णय के लिए भोपाल भेजा जाएगा। इससे उन नेताओं के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है, जो दोबारा कांग्रेस में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं।
मंत्री राकेश सिंह ने दिया सधा हुआ बयान
दूसरी ओर, इस घटनाक्रम को लेकर प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बीजेपी से जुड़े लोग पार्टी की नीति, रीति और नेतृत्व की दिशा से जुड़े हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
घर वापसी की राह पर टिकी नजरें
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में लौटने की इच्छा रखने वाले कुछ नेता फिलहाल इस मामले पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। ऐसे में अब सबकी नजर जिला समन्वय समिति की बैठक पर टिकी है। देखना होगा कि किन नेताओं की वापसी को मंजूरी मिलती है और किनके नाम भोपाल तक पहुंच पाते हैं।
कांग्रेस के इस कदम को दल बदलकर लौटने वाले नेताओं के लिए संगठनात्मक जांच-परख की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पार्टी स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय और संगठन के भीतर स्वीकार्यता को भी महत्व देने का संदेश दे रही है।

