दतिया उपचुनाव से पहले सियासत गरम! नरोत्तम मिश्रा की हो सकती है धमाकेदार ‘वापसी’, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
Sunday, May 17, 2026-12:27 PM (IST)
दतिया: मध्यप्रदेश के दतिया जिले में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद रिक्त हुई विधानसभा सीट पर उपचुनाव की औपचारिक तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पत्र के बाद जिला प्रशासन ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए राजनीतिक दलों को सक्रिय रूप से जोड़ना प्रारंभ कर दिया है।दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े द्वारा सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग के लिए आमंत्रित किया गया है। यह प्रक्रिया 19 मई को जिला मुख्यालय में आयोजित की जाएगी, जिसमें 291 मतदान केंद्रों के लिए आवश्यक मशीनों का परीक्षण किया जाएगा। प्रशासन ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दलों से 18 मई तक प्रतिनिधियों की सूची, फोटो और पहचान पत्र अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने को कहा है।
प्रतिष्ठा की जंग में बदलता दतिया का चुनावी इतिहास
दतिया की यह सीट लंबे समय से प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक सीटों में शुमार रही है। यहां कांग्रेस के राजेंद्र भारती और भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने इसे हाईप्रोफाइल बना दिया है।
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को 7,000 से अधिक मतों से पराजित किया था। लेकिन अब भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। माना जा रहा है कि यह उपचुनाव दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन सकता है।
कानूनी फैसलों से बदली सियासी तस्वीर
सूत्रों के अनुसार, राजेंद्र भारती को सहकारी बैंक एफडी घोटाले से जुड़े मामले में सजा सुनाए जाने के बाद विधानसभा से अयोग्य घोषित किया गया।
“मैं लौटकर आउंगा” बयान फिर चर्चा में
हार के बाद नरोत्तम मिश्रा द्वारा दिए गए एक पुराने बयान ने एक बार फिर सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उनका शायराना अंदाज में कहा गया वाक्य—“मैं लौटकर आउंगा” - अब उपचुनाव की आहट के बीच फिर चर्चा में है।
हार के बाद भी मिश्रा भाजपा संगठन में सक्रिय रहे और इस दौरान उन्होंने पार्टी विस्तार एवं संगठनात्मक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब उपचुनाव की संभावनाओं के बीच उनके समर्थक इसे “राजनीतिक पुनरागमन” के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
दतिया उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि दो बड़े राजनीतिक चेहरों की प्रतिष्ठा से जुड़ी लड़ाई बनता नजर आ रहा है। प्रशासनिक तैयारियाँ तेज हैं और राजनीतिक दल रणनीति बनाने में जुट चुके हैं। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा, वैसे-वैसे यह मुकाबला और अधिक दिलचस्प होता जाएगा।

