MP BJP के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री के रिश्तेदार ने लगाई सरकारी खजाने में सेंध! 30 करोड़ के घोटाले में ED का बड़ा एक्शन
Saturday, Oct 31, 2026-04:13 PM (IST)
विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से सामने आए 30.18 करोड़ रुपये के फर्जी विवाह सहायता घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के साढ़ू और सिरोंज के पूर्व जनपद पंचायत CEO शोभित त्रिपाठी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ED के भोपाल जोनल कार्यालय ने शोभित त्रिपाठी और उनके सहयोगी हेमंत साहू के नाम दर्ज 5.37 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इस कार्रवाई को करोड़ों रुपये के कथित सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
ED ने यह कदम प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत उठाया है। इस मामले की शुरुआत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), भोपाल में दर्ज एफआईआर से हुई थी। सिरोंज जनपद पंचायत में विवाह सहायता योजना के नाम पर कथित गड़बड़ियों की शिकायत और जांच के बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से पड़ताल शुरू की थी।
5,923 मामलों में 30.18 करोड़ रुपये के भुगतान का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2019 से 2021 के बीच जब शोभित त्रिपाठी सिरोंज जनपद पंचायत में CEO के पद पर पदस्थ थे, उस दौरान कथित मिलीभगत से 5,923 संदिग्ध विवाह सहायता प्रकरणों में सरकारी राशि स्वीकृत कराई गई। इन मामलों में करीब 30.18 करोड़ रुपये के भुगतान का आरोप है।
दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार की विवाह सहायता योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की बेटियों के विवाह के लिए 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेटी के विवाह में मदद पहुंचाना है। लेकिन ED की जांच में इसी योजना का कथित तौर पर दुरुपयोग कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाने का मामला सामने आया।
फर्जी आवेदन बनाकर खोले गए बैंक खाते
ED की पड़ताल में सामने आया कि कथित घोटाले को अंजाम देने के लिए फर्जी आवेदन तैयार किए गए। कई मामलों में ऐसे लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जो योजना की पात्रता ही नहीं रखते थे। आरोप है कि कुछ लोगों की जानकारी के बिना उनके दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाए गए और उन्हीं खातों में सरकारी सहायता की रकम ट्रांसफर कराई गई।
राशि खाते में पहुंचने के बाद उसे अलग-अलग किस्तों में नकद निकाल लिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद सरकारी योजना की रकम को वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचाने के बजाय कथित रूप से दूसरे लोगों के माध्यम से निकालना था।
कोरोना लॉकडाउन में भी नहीं रुका कथित खेल
इस मामले में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। जांच के अनुसार, कोविड लॉकडाउन के दौरान भी अपात्र लोगों के नाम पर विवाह सहायता राशि स्वीकृत कर भुगतान किया गया। यानी महामारी के कठिन दौर में भी कथित फर्जी हितग्राहियों के जरिए सरकारी धन निकालने का सिलसिला जारी रहा।
2 सितंबर को हुई थी पूर्व CEO की गिरफ्तारी
ED ने इससे पहले मामले से जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान जांच एजेंसी के हाथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और संदिग्ध रिकॉर्ड लगे थे। इसके बाद 2 सितंबर 2026 को शोभित त्रिपाठी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया। रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल वह जेल में हैं।
अब ED ने शोभित त्रिपाठी और हेमंत साहू से जुड़ी 5.37 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर दी हैं। एजेंसी की जांच अभी जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका और कथित घोटाले से अर्जित संपत्तियों को लेकर भी नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

