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कांग्रेस नेता ने 860 से 880 करोड़ रुपये कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचाए…शराब घोटाले को लेकर ईडी का बड़ा दावा

Tuesday, Oct 13, 2026-04:19 PM (IST)

रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया है कि शराब सिंडिकेट से अवैध रूप से अर्जित करीब 860 से 880 करोड़ रुपये राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाए गए थे। एजेंसी के अनुसार, यह रकम छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की निगरानी में पहुंचाई गई थी। इस मामले में ईडी ने अग्रवाल की 9.06 करोड़ रुपये मूल्य की दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है।

ईडी से आज मिली जानकारी के अनुसार, धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आठ अक्टूबर को संपत्तियों की कुर्की का आदेश जारी किया गया था। इसके अगले दिन नौ अक्टूबर को रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में रामगोपाल अग्रवाल के विरुद्ध पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की गई। एजेंसी ने अग्रवाल को 11 अगस्त को गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि शराब सिंडिकेट से एकत्र की गई अवैध रकम के प्रबंधन और वितरण में रामगोपाल अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

ईडी के मुताबिक, सिंडिकेट से प्राप्त धन का बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उफर् पप्पू बंसल के पास रहता था। अग्रवाल के निर्देश पर यह नकदी शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाई जाती थी, जहां उनके साथ कार्यरत अकाउंटेंट देवेंद्र डढ़सेना को रकम सौंपे जाने का दावा किया गया है। ईडी ने जांच के आधार पर आरोप लगाया है कि इस पूरे लेनदेन में करीब 72 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में थे। इस धनराशि को उनके निर्देश पर सुरक्षित रखने, खर्च करने अथवा अन्य लोगों में वितरित करने की बात सामने आई है।

एजेंसी ने अपने आरोपों के समर्थन में डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और पीएमएलए की धारा 50 के अंतर्गत दर्ज बयानों का हवाला दिया है। जांच के दौरान ईडी ने अग्रवाल के रायपुर स्थित अनुपम नगर और कटोरा तालाब के दो फ्लैटों की पहचान की है। इनकी कुल अनुमानित कीमत 9.06 करोड़ रुपये बताई गई है।

एजेंसी के अनुसार, दोनों संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुकर् कर लिया गया है। ईडी के मुताबिक, शराब घोटाले की जांच में इससे पहले 601.28 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां कुर्क, जब्त अथवा फ्रीज की जा चुकी थीं। रामगोपाल अग्रवाल की 9.06 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कारर्वाई के बाद यह राशि बढ़कर करीब 610.34 करोड़ रुपये हो गई है। एजेंसी ने रायपुर के विशेष पीएमएलए न्यायालय में इस प्रकरण से संबंधित अब तक एक मूल अभियोजन शिकायत और छह पूरक अभियोजन शिकायतें दाखिल की हैं। मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर, तत्कालीन आबकारी विभाग के प्रबंध निदेशक अरुणपति त्रिपाठी और चैतन्य बघेल समेत नौ लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। ईडी की जांच के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में सक्रिय कथित शराब सिंडिकेट ने विभिन्न माध्यमों से 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय जुटाई।

एजेंसी का आरोप है कि इस रकम की वसूली देशी शराब की आपूर्ति, बिना हिसाब-किताब वाली शराब की बिक्री, डिस्टिलर्स से कमीशन तथा विदेशी शराब की लाइसेंस व्यवस्था के जरिए की गई थी। इस प्रकरण में ईडी की ओर से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में प्रारंभिक तौर पर दो हजार करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का उल्लेख किया गया था। बाद की जांच में एजेंसी ने अपराध से अर्जित आय का आंकड़ा 2,883 करोड़ रुपये से अधिक बताया है।

ईडी का आरोप है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर से जुड़े कथित सिंडिकेट के माध्यम से शराब कारोबार में अवैध वसूली की व्यवस्था संचालित की गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित सिंडिकेट के गठन की प्रक्रिया फरवरी 2019 में शुरू हुई थी। आरोप है कि कारोबारी अनवर ढेबर ने रायपुर के जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में प्रदेश की तीन डिस्टलरी से जुड़े संचालकों और प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई थी।

ईडी की जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, इस बैठक में छत्तीसगढ़ डिस्टलरी से नवीन केडिया, भाटिया वाइंस प्राइवेट लिमिटेड से भूपेंद्र पाल सिंह भाटिया और प्रिंस भाटिया शामिल हुए थे। इनके अतिरिक्त वेलकम डिस्टलरी से राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल, हीरालाल जायसवाल तथा नवीन केडिया के संपर्क अधिकारी संजय फतेहपुरिया भी बैठक में पहुंचे थे। बैठक में एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया है। ईडी का आरोप है कि इसी दौरान शराब कारोबार से अवैध रकम जुटाने और उसके वितरण के लिए संगठित व्यवस्था विकसित की गई। जांच एजेंसी अब कथित घोटाले से अर्जित धन के अन्य लाभार्थियों, रकम के अंतिम उपयोग और उससे जुड़ी संपत्तियों का पता लगाने में जुटी है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है। ईडी के सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और संबंधित व्यक्तियों का दोष अदालत के अंतिम निर्णय से ही निर्धारित होगा।


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Content Writer

meena

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