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BJP के दिग्गज नेता ने 8 दिन तक मनाया जश्न, डिप्टी CM के साथ खाई मिठाई; बाद में पता चला अध्यक्ष बनाने का आदेश फर्जी था

Sunday, May 10, 2026-01:11 PM (IST)

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजनीति इन दिनों राजनीतिक नियुक्तियों के दौर से गुजर रही है। रोज़ किसी न किसी बोर्ड, निगम और प्राधिकरण में नई नियुक्तियों की चर्चाएं हैं। ऐसे माहौल में सत्ता के गलियारों में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने न सिर्फ प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े किए, बल्कि राजनीतिक उत्साह की हकीकत भी उजागर कर दी।

सिंगरौली विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता वीरेंद्र गोयल सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित नियुक्ति आदेश को सच मान बैठे। आदेश में उन्हें दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने की बात लिखी थी। बस फिर क्या था—बधाइयों का दौर शुरू हो गया। गोयल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से लेकर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल तक से मुलाकात कर शुभकामनाएं लेते रहे। मिठाइयां बंटी, समर्थकों ने जश्न मनाया, फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे।

हैरानी की बात यह रही कि यह पूरा राजनीतिक उत्सव करीब आठ दिनों तक चलता रहा और किसी स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। सत्ता के करीब रहने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी वायरल आदेश को ही अंतिम सत्य मान लिया।

मामले ने मोड़ तब लिया, जब नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के संज्ञान में यह घटनाक्रम आया। विभागीय जांच में साफ हुआ कि ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं हुआ था। यानी जिस नियुक्ति पर नेता जी जश्न मना रहे थे, वह पूरी तरह फर्जी निकली।

इस पूरे घटनाक्रम ने सत्ता और संगठन दोनों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अब राजनीतिक नियुक्तियां सोशल मीडिया पोस्ट देखकर तय मानी जाने लगी हैं? क्या किसी भी आदेश की पुष्टि किए बिना सार्वजनिक जश्न मनाना राजनीतिक जल्दबाज़ी नहीं कहलाएगा?

सूत्र बताते हैं कि सिंगरौली विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष पद के लिए वीरेंद्र गोयल का नाम वास्तव में चर्चा में है। लेकिन तकनीकी स्थिति यह है कि शिवराज सरकार के समय की नियुक्तियों को मोहन सरकार जनवरी 2024 में निरस्त कर चुकी है। विभागीय स्तर पर हुई प्रक्रियात्मक गड़बड़ी के कारण गोयल से जुड़ा पुराना आदेश भी पूरी तरह क्लियर नहीं हो पाया। अब पहले पुरानी स्थिति निरस्त होगी, उसके बाद ही नया आदेश जारी किया जाएगा।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह जरूर साबित कर दिया कि मध्यप्रदेश की राजनीति में “पद” का आकर्षण इतना बढ़ चुका है कि कई बार लोग आधिकारिक दस्तावेज़ देखने से पहले ही खुद को पदासीन मान बैठते हैं। और जब राजनीति में उत्साह, सिस्टम से तेज़ दौड़ने लगे, तो फर्जी आदेश भी असली जश्न बन जाते हैं।


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Content Editor

Himansh sharma

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