मूंग के रेट में अचानक उछाल, MP के किसानों की हुई बल्ले-बल्ले
Friday, Jul 31, 2026-05:04 PM (IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में गर्मी की मूंग एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। किसानों के आंदोलन के बाद सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी की सीमा बढ़ा दी है। इसका सीधा असर मंडियों में देखने को मिला, जहां मूंग के दाम एक ही दिन में 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक उछल गए। बढ़ते भाव से किसानों को राहत जरूर मिली है, लेकिन दूसरी तरफ सरकार पर हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
आंदोलन के बाद बदले हालात
प्रदेशभर में किसानों की लगातार मांग के बाद राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी की सीमा में बड़ा बदलाव किया। पहले प्रति एकड़ करीब 120 किलो तक खरीदी का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर लगभग 300 किलो प्रति एकड़ कर दिया गया। इस फैसले के बाद किसानों ने तत्काल मंडियों में बिक्री कम कर दी, जिससे बाजार में आवक घटी और कीमतों में तेजी आ गई।व्यापारियों के अनुसार कई प्रमुख मंडियों में मूंग के भाव 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए। हालांकि किसानों का कहना है कि मौजूदा बाजार भाव भी उनकी लागत और गुणवत्ता के हिसाब से पूरी राहत नहीं दे रहे हैं।
सरकार को क्यों हो रहा भारी नुकसान?
समस्या केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाने वाला खरीद कोटा है। मध्यप्रदेश में मूंग का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन केंद्र जितनी मात्रा खरीदने की अनुमति देता है, उससे कहीं अधिक उपज किसानों के पास होती है। किसानों के दबाव और आंदोलन को देखते हुए राज्य सरकार अतिरिक्त मूंग भी खरीद लेती है।यहीं से नुकसान शुरू होता है। अतिरिक्त खरीदी गई मूंग को केंद्र नहीं उठाता, इसलिए राज्य को उसे खुले बाजार में बेचना पड़ता है। लेकिन खुले बाजार में समर्थन मूल्य से काफी कम दाम मिलने के कारण सरकार को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।
दो वर्षों में हजारों करोड़ का नुकसान
सूत्रों के अनुसार पिछले दो वित्तीय वर्षों में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई अतिरिक्त मूंग को बेचने में राज्य को लगभग दो हजार करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। कई बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन खरीदारों ने समर्थन मूल्य से काफी कम कीमत की पेशकश की। आखिरकार नुकसान उठाकर ही स्टॉक का निपटान करना पड़ा।
इस साल भी बढ़ सकती है मुश्किल
वर्तमान खरीफ चक्र में भी राज्य ने केंद्र के निर्धारित लक्ष्य से लाखों मीट्रिक टन अधिक मूंग खरीदी है। अधिकारियों का कहना है कि अतिरिक्त स्टॉक बेचने के लिए कई दौर के टेंडर निकाले जा चुके हैं, लेकिन संतोषजनक दर नहीं मिल रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो सरकार को इस बार भी लगभग 1200 से 1500 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसान अभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं
भाव बढ़ने के बावजूद किसान संगठनों का कहना है कि गुणवत्ता के आधार पर मंडियों में अभी भी मूंग का मूल्य काफी कम लगाया जा रहा है। कई किसानों का दावा है कि उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है। उनका कहना है कि समर्थन मूल्य का लाभ सभी उत्पादकों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि मूंग उत्पादन, समर्थन मूल्य और खरीद नीति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। यदि केंद्र उत्पादन के अनुरूप खरीद बढ़ाए तो राज्य सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। वहीं यदि गुणवत्ता या कीटनाशकों को लेकर कोई चिंता है तो उसकी वैज्ञानिक जांच कर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए, ताकि किसानों और सरकार दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।

