आखिर अपने ही प्रदेश के किसानों की पुकार पर क्यों खामोश हैं शिवराज सिंह? मूंग खरीदी पर उठे बड़े सवाल
Wednesday, Jul 29, 2026-04:32 PM (IST)
भोपाल: मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। सबसे बड़ा सवाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका को लेकर उठ रहा है। किसानों और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जिस नेता ने मुख्यमंत्री रहते हुए "किसानों का एक-एक दाना खरीदने" का वादा किया था, आज वही अपने गृह राज्य के किसानों की सबसे बड़ी समस्या पर अपेक्षित सक्रियता क्यों नहीं दिखा रहे हैं?
दरअसल, प्रदेश सरकार ने केंद्र से 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदने की अनुमति मांगी थी, लेकिन केंद्र की ओर से केवल 4.54 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य स्वीकृत किया गया। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह लक्ष्य वास्तविक उत्पादन और किसानों की संख्या की तुलना में काफी कम है।
राज्य सरकार ने भी जताई चिंता
प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य सरकार अपने स्तर पर खरीद का लक्ष्य नहीं बढ़ा सकती, क्योंकि इसके लिए केंद्र की मंजूरी अनिवार्य है।

आंकड़े बढ़ा रहे चिंता
इस वर्ष प्रदेश में लगभग 20.16 लाख मीट्रिक टन मूंग उत्पादन का अनुमान।
3.47 लाख किसानों ने उपार्जन के लिए पंजीयन कराया।
अब तक केवल करीब 82 हजार किसान ही अपनी फसल बेच सके हैं।
पिछले वर्ष 7.72 लाख मीट्रिक टन मूंग की रिकॉर्ड खरीदी हुई थी, जबकि इस बार लक्ष्य उससे काफी कम रखा गया है।
इन आंकड़ों के बाद किसानों में यह सवाल उठ रहा है कि जब उत्पादन अधिक है और पंजीयन भी रिकॉर्ड स्तर पर हुआ है, तो खरीद का लक्ष्य घटाने का आधार क्या है?
आंदोलन की आशंका
प्रदेश सरकार लगातार मांग कर रही है कि प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत अन्य राज्यों के अप्रयुक्त कोटे को मध्य प्रदेश को आवंटित किया जाए, ताकि अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द लक्ष्य नहीं बढ़ाया गया, तो बड़ी संख्या में किसानों को खुले बाजार में कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ सकती है, जिससे असंतोष बढ़ सकता है।
अब सबकी निगाहें केंद्र पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केंद्रीय कृषि मंत्रालय मध्य प्रदेश की मांग स्वीकार करते हुए मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाएगा? लाखों किसान फैसले का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए जल्द कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

