ग्वालियर हादसे पर जीतू पटवारी का बड़ा हमला, बोले- कलेक्टर-SP पद पर कैसे बने हुए हैं? सिंधिया को भी घेरा
Wednesday, Oct 21, 2026-03:54 PM (IST)
ग्वालियर: (अंकुर जैन): मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी बुधवार को ग्वालियर पहुंचे, जहां उन्होंने शीतला माता मंदिर हादसे को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। पटवारी ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने की बात कही। उन्होंने दुर्घटना के लिए प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। इसके अलावा पटवारी ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल के बिजली बिल, दिग्विजय सिंह की अयोध्या यात्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के बयानों को लेकर भी निशाना साधा।
शीतला मंदिर हादसे पर सरकार को घेरा, कलेक्टर-एसपी की जिम्मेदारी तय करने की मांग
शीतला माता मंदिर हादसे को लेकर जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है। पटवारी ने अपने बयान में कफ सिरप से बच्चों की मौत, जहरीली शराब की घटनाओं, इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और अब ग्वालियर में हुए हादसे का जिक्र किया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि इतनी भारी भीड़ के बीच मंदिर परिसर तक ट्रक कैसे पहुंच गया? उन्होंने कहा कि हादसे के बाद केवल संवेदनाएं व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
पटवारी ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी कलेक्टर और एसपी अपने पदों पर कैसे बने हुए हैं? सरकार को राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस हादसे के लिए प्रशासनिक स्तर पर कौन जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवारों को न्याय और राहत की जरूरत है।
उन्होंने घायलों के उपचार को लेकर भी सवाल उठाए। पटवारी के मुताबिक, किसी मरीज को एयरलिफ्ट करना संवेदनशीलता का परिचायक हो सकता है, लेकिन यदि उसके बाद अस्पताल में समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते, तो यह व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाएगी।
दिग्विजय सिंह की अयोध्या यात्रा पर बोले- देश के असली मुद्दों पर भी हो चर्चा
दिग्विजय सिंह की अयोध्या तक प्रस्तावित यात्रा को लेकर भाजपा की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि देश में बेरोजगारी, महंगाई और बढ़ते आर्थिक दबाव जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल जनता की समस्याओं से जुड़े सवालों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पटवारी ने मंदिरों में चढ़ावे और चंदे की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी होती है, इसलिए वहां होने वाली घटनाओं और व्यवस्थाओं पर चर्चा करना जरूरी है। उनके अनुसार, भाजपा को केवल आरोप लगाने के बजाय अपनी गलतियों को भी स्वीकार करना चाहिए।
सिंधिया के महल के बिजली बिल पर भी उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल के बिजली बिल को लेकर भी जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि सिंधिया के महल का बिजली बिल करीब 1,500 रुपये आया है, जबकि आम और गरीब परिवारों को हजारों रुपये के बिजली बिल मिलने की शिकायतें सामने आती हैं।
पटवारी ने सवाल किया कि जब एक ओर बड़ी संपत्तियों और महलों को लेकर चर्चा होती है, वहीं दूसरी ओर मेहनत-मजदूरी करके परिवार चलाने वाले लोगों पर बिजली बिल का बोझ पड़ता है, तो सरकार की संवेदनशीलता कहां दिखाई देती है? उन्होंने कहा कि सरकार को आम जनता की आर्थिक परेशानियों पर भी ध्यान देना चाहिए।
मोहन भागवत पर पटवारी का पलटवार, बोले- बेरोजगारी और महंगाई पर बात क्यों नहीं होती?
देश में युवाओं को भड़काने और बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल या फ्रांस जैसे हालात पैदा करने के प्रयासों से जुड़े सवाल पर जीतू पटवारी ने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार देता है।
उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, नशे की समस्या, महंगाई, देश पर बढ़ते कर्ज और चुनाव आयोग को लेकर उठ रहे सवालों पर भी चर्चा होनी चाहिए। पटवारी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधते हुए कहा कि जब आरएसएस राजनीति से दूरी की बात करता है, तब राजनीतिक मुद्दों पर उसकी टिप्पणियों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पटवारी ने कांग्रेस की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की आजादी में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी सहित कई नेताओं ने योगदान दिया। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत लोकतंत्र, संविधान और देश की एकता में है। उनके मुताबिक, देश की समस्याओं का समाधान जनता की आवाज सुनने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने से होगा।

