घोषणाएं नहीं, किसानों-आदिवासियों के मुद्दों पर सवालों के जवाब चाहिए, जीतू पटवारी का सरकार पर बड़ा हमला
Monday, Mar 02, 2026-02:37 PM (IST)
भोपाल : मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू जितेंद्र पटवारी ने जनजातीय बहुल बड़वानी जिले में आयोजित हो रही कृषि कैबिनेट को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधे सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह कैबिनेट वाकई किसानों और आदिवासी समाज के नाम पर हो रही है तो घोषणाओं की बजाय जमीनी हकीकत पर ठोस जवाब और कारर्वाई की जरूरत है।
पटवारी ने कहा कि बड़वानी केवल कैबिनेट बैठक का स्थान नहीं, बल्कि प्रदेश की आत्मा का जनजातीय चेहरा है। खेत-खलिहानों के बीच बैठकर फैसले लेने का दावा किया जा रहा है, लेकिन किसानों के संकट और आदिवासी समाज की पीड़ा पर अब तक की उदासीनता चिंताजनक है। किसानों के ज्वलंत मुद्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल मंडियों में पहुंच चुकी है, लेकिन सरकारी खरीद की पुख्ता व्यवस्था क्यों नहीं है। गेहूं, सोयाबीन और धान के लिए घोषित बढ़ी हुई न्यूनतम समर्थन मूल्य का वादा कब पूरा होगा। उन्होंने पूछा कि अमेरिकी ट्रेड डील के चलते सस्ते कृषि उत्पादों के आयात से प्रदेश के किसानों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए राज्य सरकार की क्या रणनीति है और क्या राज्य स्तरीय मूल्य स्थिरीकरण कोष बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को फसल बीमा और मुआवजा समय पर क्यों नहीं मिल रहा है। कितने दावे लंबित हैं और खाद, बीज, डीजल व बिजली की बढ़ती लागत के बीच इनपुट लागत कम करने के लिए विशेष राहत पैकेज कब लाया जाएगा।
आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर पटवारी ने कहा कि प्रदेश से बड़ी संख्या में बच्चियां लापता बताई जा रही हैं, जिनमें आदिवासी बच्चियों की संख्या भी चिंताजनक है। उन्होंने सरकार से जिलेवार श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने पूछा कि सरकारी नौकरियों में आदिवासी वर्ग के बैकलॉग पद अब तक खाली क्यों हैं, राज्य सेवा और पुलिस भर्ती में अनुसूचित जनजाति के कितने पद रिक्त हैं और उन्हें भरने की समय-सीमा क्या है। उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की लंबित छात्रवृत्ति, अपराध के बढ़ते मामलों और आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। पटवारी ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 के नाम पर हो रही इस कैबिनेट से किसानों और आदिवासियों को उम्मीद है, लेकिन यदि सवालों के जवाब नहीं मिले तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार की प्राथमिकताएं जनता से ज्यादा सत्ता तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों और आदिवासियों के हक के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

