माघ पूर्णिमा 2026: खैरगढ़ नर्मदा कुंड में शुरू हुआ तीन दिवसीय भव्य मेला
Friday, Jan 30, 2026-12:57 PM (IST)
खैरागढ़: (हेमंत पाल): माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर खैरागढ़ जिले के गंडई क्षेत्र में स्थित खैर नर्मदा कुंड एक बार फिर श्रद्धा भक्ति और आस्था के रंग में रंग गया है। यहां प्रतिवर्ष लगने वाला प्रसिद्ध तीन दिवसीय नर्मदा मेला आज विधिवत प्रारंभ हो गया। सुबह से ही नर्मदा मैया के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा और श्रद्धालुओं का सैलाब कुंड की ओर उमड़ पड़ा।
मां नर्मदा को जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी नदी के रूप में पूजने की परंपरा इस अंचल में पीढ़ियों से चली आ रही है। लोक मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन नर्मदा स्नान करने से मनुष्य के समस्त पाप कट जाते हैं और जीवन में सुख शांति और समृद्धि का वास होता है। इसी अटूट विश्वास के कारण हर वर्ष हजारों श्रद्धालु दूर दराज के गांवों और जिलों से पैदल और वाहनों के माध्यम से खैर नर्मदा कुंड पहुंचते हैं।
खैर नर्मदा कुंड केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि इतिहास और पुरातत्व की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। स्थानीय जानकारों के अनुसार नर्मदा मंदिर लगभग तीन सौ से चार सौ वर्ष पुराना है जबकि मंदिर परिसर में स्थापित प्रस्तर प्रतिमाएं कल्चुरी कालीन दसवीं और ग्यारहवीं शताब्दी की मानी जाती हैं। इन मूर्तियों में भगवान गणेश वीरभद्र देवी नर्मदा बैकुंठधाम अलंकृत नंदी शिवलिंग और जलहरी प्रमुख हैं।

मंदिर के शिखर और जंघा भाग में उकेरी गई मध्यकालीन मूर्तिकला दर्शकों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। यहां रावण कच्छपावतार मत्स्यावतार और नरसिंह अवतार का अत्यंत सजीव और कलात्मक अंकन देखने को मिलता है। यह शिल्प वैभव उस युग के कलाकारों की उच्च कोटि की कला दृष्टि और धार्मिक चेतना का प्रमाण है।
लोक आस्था के अनुसार खैर नर्मदा कुंड स्वयं मां नर्मदा का प्रकट स्थल माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां श्रद्धा भाव से स्नान और दर्शन करने से रोग शोक और कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है। यही कारण है कि मेले के दौरान बुजुर्ग युवा और बच्चे सभी नर्मदा मैया के जयघोष के साथ कुंड की परिक्रमा करते नजर आते हैं।
तीन दिनों तक चलने वाला यह नर्मदा मेला इस अंचल का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है। मेले में पूजा पाठ हवन भजन कीर्तन अखंड रामायण पाठ जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के साथ साथ स्थानीय लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मेला समिति द्वारा सुरक्षा यातायात स्वास्थ्य पेयजल प्रकाश और साफ सफाई के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। स्वयंसेवक लगातार व्यवस्था संभालते हुए श्रद्धालुओं की मदद कर रहे हैं। यह मेला स्थानीय ग्रामीणों और छोटे व्यापारियों के लिए आजीविका का बड़ा माध्यम भी है। पूजा सामग्री खिलौने हस्तशिल्प और खान पान की दुकानों से मेला क्षेत्र गुलजार है। तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देता है।
नर्मदा मैया के जयकारों और दीप धूप की लौ के बीच प्रारंभ हुआ यह नर्मदा मेला आने वाले दिनों में भी श्रद्धा इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता रहेगा। खैर नर्मदा कुंड एक बार फिर आस्था और परंपरा का जीवंत केंद्र बन गया है।

