6 नर्सों के भरोसे चल रहा खैरागढ़ जिला अस्पताल ! CMHO बोले- चिट्ठी डालते डालते थक गया
Saturday, Aug 30, 2025-02:29 PM (IST)

खैरागढ़ (हेमंत पाल) : सिविल अस्पताल खैरागढ़ की हालत देखकर लगता है जैसे स्वास्थ्य विभाग खुद "ICU" में भर्ती है, और उसे होश में लाने वाला कोई डॉक्टर या जिम्मेदार अफसर दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा। हैरान कर देने वाली बात यह है कि 6 नर्सों के भरोसे अस्पताल चल रहा है। वहीं सीएचएमओ का कहना है कि डॉक्टर और स्टाफ की डिमांड को लेकर चिट्ठी डालते डालते वे थक गए हैं, लेकिन इस मामले में ्भी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
6 नर्सों से चल रहा पूरा अस्पताल – समझिए, चमत्कार ही है!
जी हां, एक पूरे जिले का सिविल अस्पताल महज 6 स्टाफ नर्सों के भरोसे चल रहा है। दो-दो की ड्यूटी में, तीन शिफ्टों में सेवा! अगर आपको लगता है कि ये मिशन इंपॉसिबल है, तो खैरागढ़ आइए – यहां नामुमकिन को भी मुमकिन बना लिया गया है… मरीजों की जान की कीमत पर।
मरीज बोलें – इलाज नहीं, झिड़कियां मिलती हैं
इलाज के लिए आने वाले मरीजों को दवा से ज़्यादा डांट मिल रही है। कहीं नर्स गुस्से में तीखे जवाब दे रही है, तो कहीं मरीज को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है – वो भी इस उम्मीद में कि शायद कोई डॉक्टर 'दर्शन' दे दे। हालात ये हैं कि मरीज अपना गुस्सा छोड़, अस्पताल ही छोड़ रहे हैं और प्राइवेट अस्पतालों की शरण में जा रहे हैं – जहाँ इलाज के साथ सम्मान भी मिलता है, भले ही जेब खाली हो जाए।
अस्पताल के नाम पर न तो डॉक्टर रहते हैं, न सुरक्षा। पूरी इमारत चारों ओर से खुली है, और सुरक्षा के नाम पर एक मात्र गार्ड – जो खुद किसी जीवनदीप समिति से 'भेजा' गया है। ये गार्ड क्या सुरक्षा करेगा, जब पूरा सिस्टम ही असुरक्षित है?
CMHO बोले – चिठ्ठी डालते-डालते थक गए हैं
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा ने खुद माना कि स्टाफ, डॉक्टर, संसाधन – हर चीज की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि कई बार शासन को पत्र भेजे गए, लेकिन वहाँ से “Seen” का भी जवाब नहीं आता।
तो सवाल यह है:
जब अस्पताल खुद बीमार है, तो मरीजों का इलाज कौन करेगा? क्या खैरागढ़ के गरीबों की जान इतनी सस्ती है कि उन्हें सिर्फ "प्रबंधन की मजबूरी" पर छोड़ दिया जाए?