राज्य में 20% कलेक्टरों की छुट्टी तय! बजट सत्र के बाद बड़े पैमाने पर होंगे Transfer
Sunday, Feb 15, 2026-12:55 PM (IST)
भोपाल: मध्यप्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल तय माना जा रहा है। बजट सत्र समाप्त होते ही राज्य सरकार 12 से 20 प्रतिशत जिलों के कलेक्टरों के तबादले कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में हुई प्रशासनिक सर्जरी अभी अधूरी है और असली बदलाव सत्र के बाद देखने को मिलेगा। मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा सभी जिलों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन में कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
इन योजनाओं में खराब परफॉर्मेंस बनी तबादलों की वजह
केंद्र सरकार की योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी व ग्रामीण), परिवार कल्याण योजनाएं और धरती आबा ग्राम उत्कृष्ट अभियान की सीधी मॉनिटरिंग केंद्र स्तर से की जा रही है। कई जिलों में इन योजनाओं का क्रियान्वयन कमजोर पाया गया है। कुछ परियोजनाएं पीएम प्रगति पोर्टल पर भी निगरानी में हैं, जिससे खराब रिपोर्ट सीधे केंद्र तक पहुंच रही है।
मातृ-शिशु मृत्यु दर, शिक्षा और स्वास्थ्य में पिछड़े जिले
राज्य के कई जिलों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है। शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं की स्थिति भी कई जिलों में संतोषजनक नहीं है। 40 से 50 प्रतिशत जिलों में नामांतरण और बंटवारे के प्रकरण लंबे समय से अटके हुए हैं, जिससे सरकार की छवि प्रभावित हो रही है।
इन कमियों से बिगड़ी जिलों की रिपोर्ट
खाद संकट: रबी और खरीफ सीजन में रीवा, भिंड, दतिया, नर्मदापुरम और रायसेन जैसे जिलों में खाद वितरण व्यवस्था कमजोर रही।
सरकारी स्कूलों में गिरता पंजीयन: कई जिलों में बच्चों का नामांकन लगातार घट रहा है।
अतिक्रमण की बढ़ती घटनाएं: सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले बढ़े हैं।
सड़क हादसे और प्रशासनिक लापरवाही: दुर्घटनाओं में इजाफा, जनहानि की घटनाएं बढ़ीं।
प्रशासनिक और राजनीतिक तालमेल की कमी: जनप्रतिनिधियों से समन्वय न होने से विकास कार्य प्रभावित हुए।
अवैध खनन पर लगाम नहीं: कई जिलों से लगातार शिकायतें सामने आई हैं।
बजट सत्र के बाद होगा बड़ा प्रशासनिक एक्शन
सूत्रों का दावा है कि बजट सत्र खत्म होते ही सरकार परफॉर्मेंस के आधार पर कमजोर कलेक्टरों को हटाकर नए अफसरों को जिम्मेदारी दे सकती है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक महकमे में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिलेंगे।

