Punjab Kesari MP ads

MP में जल्द हो सकता है बड़ा फेरबदल! 4 मंत्रियों के इस्तीफे की चर्चा, इन दिग्गजों को मिल सकती है जगह

Thursday, May 14, 2026-07:35 PM (IST)

भोपाल : मध्य प्रदेश की राजनीति में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगुवाई वाली सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। फिलहाल मंत्रिमंडल में चार पद खाली हैं और इससे भी अहम बात यह कि 4 मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है। ऐसे में सीटों पर नए चेहरों की एंट्री की संभावना जताई जा रही है।

मोहन यादव सरकार के गठन के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। अब पार्टी संगठन और सरकार मिशन 2028 की रणनीति को ध्यान में रखते हुए नए राजनीतिक समीकरण साधने में जुटी हुई है। सूत्रों के मुताबिक जून के अंत या जुलाई के पहले पखवाड़े तक विस्तार और फेरबदल पर फैसला लिया जा सकता है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में विंध्य, महाकोशल और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के नेताओं को प्राथमिकता मिल सकती है। भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की कोशिश करेगी। कई वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री भी मंत्री पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं। जिनमें 9 बार के विधायक गोपाल भार्गव को मौका मिल सकता है। वहीं महिलाओं में से सबसे प्रभावी नाम इंदौर से मालिनी गौड़ का भी बताया जा रहा है। इसके अलावा सिंधिया कोटे से बृजेंद्र सिंह यादव भी मंत्री हो सकते हैं। वहीं शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया, अर्चना चिटनीस के नाम भी सुर्खियों में है।

सूत्रों के अनुसार केवल नए चेहरों को मौका देने की तैयारी नहीं है, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। इनमें बयानों से विवादों में घिरे कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल, प्रहलाद सिंह पटेल और विजय शाह शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लेडी अफसर सोफिया पर टिप्पणी करने वाले शाह पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ऐसे मंत्रियों पर पार्टी नेतृत्व की नजर है जिनका प्रदर्शन कमजोर माना जा रहा है या जो विवादों के कारण सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके हैं। इस बार फैसले में प्रदर्शन और राजनीतिक प्रभाव दोनों को आधार बनाया जा सकता है।

बताया जा रहा है कि 17 मई को मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे। इन बैठकों में मंत्रियों के कामकाज, संगठनात्मक तालमेल और आगामी रणनीति पर चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि इसी फीडबैक के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

भाजपा अब प्रदेश में मिशन 2028 की तैयारियों में पूरी तरह जुट चुकी है। पार्टी चाहती है कि आगामी चुनावों से पहले सरकार और संगठन दोनों स्तर पर मजबूत संदेश जाए। यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि बड़े राजनीतिक रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में कई बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

meena

Related News