Mid Day Meal Scam: 23 लाख का घोटाला, शिकायत करने वाली अधिकारी ही निकली दोषी
Friday, Jan 30, 2026-11:46 PM (IST)
देवास: मध्य प्रदेश के देवास जिले में मध्यान्ह भोजन योजना (Mid-Day Meal) में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिला पंचायत द्वारा संचालित योजना में बच्चों के भोजन के नाम पर करीब 23 लाख रुपये का गबन किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस अधिकारी ने इस घोटाले की शिकायत की थी, जांच में वही खुद भी दोषी पाई गई।
जांच में खुला समानांतर भुगतान का खेल
जांच में सामने आया कि वर्ष 2021-22 से लगातार फर्जीवाड़ा चल रहा था। वास्तविक स्वीकृत समूहों द्वारा भोजन वितरण और भुगतान नियमित रूप से हो रहा था, इसके बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने फर्जी स्वयं सहायता समूह दिखाकर अपने परिजनों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई।
किसने कितना किया गबन?
बैंक रिकॉर्ड की जांच में खुलासा हुआ कि—
आरती किरावर (संविदा क्वालिटी मॉनीटर, पूर्व प्रभारी) ने 8.53 लाख रुपये,
अर्पणा जैन (क्वालिटी मॉनीटर, वर्तमान प्रभारी) ने 2.48 लाख रुपये,
अमन व्यास (डाटा एंट्री ऑपरेटर) ने 12.29 लाख रुपये का फर्जी भुगतान कराया।
तीनों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए
केंद्रीकृत रसोई के बावजूद फर्जीवाड़ा
शहरी क्षेत्र में मध्यान्ह भोजन केंद्रीकृत रसोई प्रणाली से संचालित होता है, जहां स्वीकृत एजेंसी द्वारा भोजन बनाकर स्कूलों तक पहुंचाया जाता है और उसी आधार पर भुगतान होता है। इसके बावजूद जांच में पाया गया कि कर्मचारियों ने समानांतर फर्जी समूह बनाकर अलग से भुगतान उठा लिया।
पत्नी के खाते में कराया भुगतान
मामले में सबसे सनसनीखेज खुलासा यह रहा कि डाटा एंट्री ऑपरेटर अमन व्यास ने अपनी पत्नी को स्वयं सहायता समूह की सदस्य बताकर सीधे उसके खाते में भुगतान करा दिया।
कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई
कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देश पर तीनों से राशि की वसूली, सेवा से बर्खास्तगी और एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। बच्चों के पोषण से जुड़ी योजना में इस तरह की धोखाधड़ी ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें इस पर हैं कि दोषियों पर कार्रवाई कितनी तेजी और सख्ती से होती है।

