BJP के एक फैसले से एमपी के 5 दिग्गजों को बड़ा झटका! हरदीप पुरी की एंट्री से बिगड़ा पूरा खेल
Wednesday, Oct 28, 2026-05:43 PM (IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की खाली सीट को लेकर चल रही सियासी अटकलों पर बीजेपी के फैसले ने विराम लगा दिया है। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया है। इस निर्णय के साथ ही मध्यप्रदेश के उन वरिष्ठ नेताओं की उम्मीदों को झटका लगा है, जो राज्यसभा के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में अपनी नई भूमिका तलाश रहे थे। प्रदेश के करीब पांच प्रमुख नेताओं के नामों पर चर्चा होने के बावजूद पार्टी ने दूसरे राज्य के नेता को प्राथमिकता दी है।
इस फैसले से एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि मध्यप्रदेश के नेताओं की दिल्ली में राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की संभावनाएं फिलहाल कितनी मजबूत हैं। पूर्व मंत्री और संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे कई नेताओं को अब किसी अन्य अवसर का इंतजार करना पड़ सकता है।
कोर कमेटी की बैठक में सामने आए थे पांच नाम
राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार तय करने से पहले भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास पर बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक हुई थी। बैठक में प्रदेश के संभावित दावेदारों के नामों पर मंथन किया गया। इसमें प्रदेश प्रभारी बिप्लव कुमार देब, सह प्रभारी रेखा वर्मा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।
बैठक के दौरान मध्यप्रदेश से पांच नेताओं की दावेदारी पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें आदिवासी, दलित और सामान्य वर्ग के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने के विकल्पों पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि प्रदेश स्तर पर विचार-विमर्श के बाद संभावित नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजा गया था।
इन पांच नेताओं के नामों पर थी चर्चा
राज्यसभा के लिए जिन नेताओं के नाम प्रमुखता से सामने आए थे, उनमें पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य, अरविंद भदौरिया, रंजना बघेल, पूर्व राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी और सिंगरौली जिले की चितरंगी सीट से पूर्व विधायक अमर सिंह शामिल थे।
इन नेताओं के नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में माना जा रहा था कि पार्टी प्रदेश के किसी वरिष्ठ नेता को राज्यसभा भेजकर मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व मजबूत कर सकती है। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व ने हरदीप सिंह पुरी के नाम पर मुहर लगाकर इन संभावनाओं को फिलहाल समाप्त कर दिया।
इस फैसले का असर केवल पांच संभावित दावेदारों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। प्रदेश के दूसरे नेताओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद थी। अब उन्हें पार्टी के आगामी फैसलों और संगठन में मिलने वाले अवसरों पर नजर रखनी होगी।
दूसरे राज्य से उम्मीदवार उतारने का विकल्प भी था
राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश नेतृत्व को पहले ही संकेत मिल चुके थे कि राज्यसभा सीट के लिए किसी अन्य राज्य के नेता को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। ऐसे में मध्यप्रदेश के नेताओं के नामों पर चर्चा होने के बावजूद अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति के अनुरूप हुआ।
बीजेपी में राज्यसभा उम्मीदवारों का चयन केवल प्रदेश की दावेदारी के आधार पर नहीं होता। इसमें राष्ट्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताएं, संगठनात्मक समीकरण और राजनीतिक जरूरतें भी अहम भूमिका निभाती हैं। मध्यप्रदेश की इस सीट पर हुआ फैसला भी इसी व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
12 नवंबर को होगा मतदान
यह राज्यसभा सीट डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 14 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिपरिषद के साथ-साथ राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने 22 अक्टूबर को उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मध्यप्रदेश की इस सीट के लिए 12 नवंबर को मतदान होना है। मतदान के दिन ही शाम पांच बजे मतगणना और परिणाम की घोषणा की जाएगी। हरदीप सिंह पुरी के नाम की घोषणा के बाद अब राज्यसभा चुनाव को लेकर तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। वहीं, मध्यप्रदेश के जिन वरिष्ठ नेताओं की नजर इस सीट पर थी, उनके लिए फिलहाल इंतजार बढ़ गया है। राष्ट्रीय नेतृत्व का यह फैसला प्रदेश की राजनीति में इस चर्चा को भी हवा दे रहा है कि दिल्ली में प्रभाव और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं को अब आगे किस अवसर का इंतजार करना होगा।

