निगम-मंडल में नियुक्तियां नाम लगभग फाइनल! दिग्गजों के साथ इन नेताओं को भी मिलेगा मौका, देखें नाम
Monday, Apr 20, 2026-11:24 PM (IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षित निगम-मंडल और प्राधिकरणों की नियुक्तियों को लेकर अब स्थिति लगभग स्पष्ट मानी जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार संभावित नामों की सूची को शीर्ष स्तर से हरी झंडी मिल चुकी है, और जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा किए जाने की संभावना है। इन नियुक्तियों को आगामी चुनावी रणनीति के अहम हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत पार्टी उन वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय भूमिका में लाने की तैयारी कर रही है, जो या तो चुनावी राजनीति में निष्क्रिय हो गए थे या हालिया चुनावों में पराजित हुए थे।
आयोगों और निगमों के लिए प्रमुख नाम लगभग तय
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभिन्न आयोगों और निगमों में कई नामों पर सहमति बन चुकी है। अनुसूचित जाति आयोग के लिए कैलाश जाटव, अनुसूचित जनजाति आयोग के लिए भगत सिंह नेताम तथा युवा आयोग के लिए प्रवीण शर्मा के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। इसी क्रम में लघु उद्योग निगम की जिम्मेदारी विनोद गोटिया को, मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की कमान संजय नगाइच को, कटनी विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी शशांक श्रीवास्तव को तथा ओरछा विकास प्राधिकरण के लिए अखिलेश अयाची को दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। वित्त विकास निगम के लिए दीपक सक्सेना और कोल विकास प्राधिकरण के लिए रामलाल रौतेल के नाम भी लगभग तय माने जा रहे हैं।
वरिष्ठ नेताओं को भी मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार संगठनात्मक संतुलन साधते हुए कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों को भी महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जा सकते हैं। इनमें लालसिंह आर्य, अरविंद भदौरिया, रामनिवास रावत, उमाशंकर गुप्ता, कमल पटेल, रामपाल सिंह और इमरती देवी जैसे प्रमुख नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा अंचल सोनकर, संजय शुक्ला, अलकेश आर्य और कलसिंह भाबर के नाम भी संभावित सूची में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
जल्द हो सकती है आधिकारिक घोषणा
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार सभी नामों पर लगभग अंतिम सहमति बन चुकी है और अब केवल औपचारिक घोषणा शेष है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस सूची को सार्वजनिक कर दिया जाएगा।इन नियुक्तियों के बाद प्रदेश की राजनीति में न केवल संगठनात्मक स्तर पर नई सक्रियता देखने को मिलेगी, बल्कि आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों में भी अहम बदलाव संभव हैं।

