निगम मंडल नियुक्तियों को लेकर बड़ा अपडेट! जानें फिर कब शुरु होगा नियुक्तियों का सिलसिला
Thursday, May 21, 2026-06:42 PM (IST)
भोपाल : कुछ दिन पहले एक समय था जब भाजपा में निगम मंडल, विकास प्राधिकरण और आयोगों में धड़ाधड़ नियुक्तियां हो रही थी। भाजपा ने करीब 60 से ज्यादा पदों पर ताबड़तोड़ नियुक्तियां की। लेकिन अचानक से इन नियुक्तियों पर ब्रेक लग गया। हालांकि इसकी वजह 5 राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजें बताए जा रहे हैं, लेकिन इस ब्रेक की एक और बड़ी वजह भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इसकी वजह पीएम मोदी की ईंधन बचाने वाली अपील है। क्योंकि नियुक्त भाजपा नेता रैलियां निकाल रहे थे जो भाजपा के कायदे कानून के खिलाफ था। नतीजन पार्टी हाईकमान ने आमजन को कड़ा संदेश देने के लिए 17 से अधिक नेताओं पर कड़ी कार्रवाई की। कुछ को नोटिस थमाया तो कुछ से तो पद भी छीन लिया। मामला जो भी रहा हो लेकिन नियुक्तियों की आस में बैठे भाजपा नेता खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं, क्योंकि अंतिम दौर में जब उनकी बारी आने वाली थी तब सबकुछ अचानक से अटक गया।
पीएम मोदी की अपील को किया अनदेखा
मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने एक सभा में देशवासियों से पेट्रोल डीजल बचाने के साथ साथ कुछ अन्य अपीलें की। इसके लिए सबसे पहले अपना काफिला कम किया। इसके बाद तत्काल ही CM मोहन ने भी अपनी गाड़ियों की संख्या कम कर दी। इतना बड़ा संदेश मिलने के बावजूद भाजपा के कुछ नेता बाज नहीं आए और निगम मंडल और संगठन में नियुक्ति मिलते ही शक्ति प्रदर्शन करते हुए सैकड़ों गाडिय़ों के साथ पदभार ग्रहण करने भोपाल पहुंचे।
नसीहत के साथ होगी नियुक्तियां
पार्टी हाईकमान के एक्शन के बावजूद भाजपा नेताओं का काफिला के साथ रैली या शक्ति प्रदर्शन के मामले सामने आने की वजह से भाजपा संगठन को समझ में आ गया कि नियुक्तियां होने पर जोश में रैली निकालेंगे का सिलसिला थमने वाला नहीं है। इसके चलते घोषणाओं को कुछ दिनों के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जब तक परिस्थिति नियंत्रण में नहीं आ जाती है। हालांकि सीएम यादव व क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल चाहते हैं कि नियुक्तियां जल्द से जल्द की जाए। साथ ही रैली न निकालने की सख्त हिदायत दी जाए। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो प्रदेश में एक बार फिर से नियुक्तियों का दौर जल्द ही शुरु हो सकता है।
भाजपा नेताओं को लगा बड़ा झटका
नियुक्तियों पर ब्रेक लगते ही अपनी बारी का इंतजार कर रहे भाजपा के कई नेताओं को बड़ा झटका लगा है। खासकर इनमें इंदौर के कई नेता शामिल हैं। क्योंकि उन्हें निगम मंडल और आइडीए में अपने नाम की घोषणा की इंतजार था। ऐसे नेताओं का प्रदेश की सत्ता और संगठन के प्रति नाराज होना स्वाभाविक है। इसकी दूसरी बड़ी वजह यह भी है कि इंदौर को अब तक नियुक्ति में कुछ नहीं मिला है।

