MP में 3500 नेता चुनाव लड़ने से बाहर! निर्वाचन आयोग की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप
Monday, May 11, 2026-01:34 PM (IST)
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में आने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले राज्य निर्वाचन आयोग की बड़ी कार्रवाई ने हजारों नेताओं और दावेदारों की सियासी जमीन हिला दी है। चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे करीब 3500 पूर्व प्रत्याशियों को आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है। वजह सिर्फ एक — चुनाव खर्च का हिसाब न देना। दरअसल, 2022 में हुए नगरीय निकाय चुनाव के बाद कई उम्मीदवारों ने तय समय सीमा के भीतर अपने चुनावी खर्च का पूरा ब्यौरा आयोग को नहीं सौंपा। नियम साफ है कि परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर हर प्रत्याशी को खर्च की पाई-पाई का हिसाब देना अनिवार्य होता है। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवार सामने आए जिन्होंने या तो जानकारी ही जमा नहीं की या फिर अधूरी और असंतोषजनक जानकारी दी। लगातार सुनवाई और अंतिम अवसर देने के बावजूद जब ये अभ्यर्थी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके तो आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें 2 से 5 साल तक के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया।
इस कार्रवाई का सीधा असर अब 2027 में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों पर दिखाई देगा। जिन नेताओं पर पांच साल की अयोग्यता लगी है, वे 2031 तक किसी भी चुनाव में दावेदारी नहीं कर पाएंगे। वहीं दो साल की पाबंदी झेल रहे नेता भी अगले निकाय चुनाव से बाहर हो जाएंगे। यानी जिन चेहरों ने अपने क्षेत्रों में फिर से राजनीतिक सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी थी, उनके लिए आयोग का यह फैसला बड़ा झटका बन गया है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने सुनवाई प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाया है। अभ्यर्थियों को भोपाल आने की जरूरत नहीं पड़ी, बल्कि जिला मुख्यालय स्थित एनआईसी केंद्रों के माध्यम से उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। हर गुरुवार डेढ़ घंटे तक सुनवाई हुई, लेकिन अधिकांश मामलों में प्रत्याशी खर्च का प्रमाण देने में विफल रहे।
राजधानी भोपाल में भी इस कार्रवाई का बड़ा असर देखने को मिला है। यहां 100 डिफॉल्टर उम्मीदवारों की सूची तैयार की गई थी, जिनमें से केवल 12 अभ्यर्थी ही आयोग को संतोषजनक जानकारी दे पाए। बाकी 82 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया गया। इनमें कई वार्डों के चर्चित चेहरे शामिल हैं। वार्ड-1 से इमाम खां एडवोकेट और बेनी प्रसाद मीना, वार्ड-2 से शैलेंद्र सोनू तोमर, वार्ड-12 से समीर खान और वसीम खान, जबकि वार्ड-19 से ओसाफ अली, आदिल खां और महेंद्र सिंह जैसे नामों पर कार्रवाई हुई है।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि इस सख्ती का मकसद चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और धनबल के बढ़ते प्रभाव पर लगाम लगाना है। आयोग मानता है कि यदि चुनावी खर्च का सही रिकॉर्ड नहीं रखा जाएगा तो निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा कमजोर होगी। यही कारण है कि इस बार आयोग ने नियमों को लेकर कोई नरमी नहीं दिखाई।
राजनीतिक गलियारों में अब इस कार्रवाई की जोरदार चर्चा है। कई स्थानीय नेताओं की चुनावी रणनीति अचानक बदल गई है, वहीं दूसरी ओर आयोग के इस कदम को साफ और पारदर्शी राजनीति की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है।
सबसे ज्यादा पढ़े गए
Related News
MP में पुलिस की बड़ी कार्रवाई! कांग्रेस के दिग्गज नेता को किया गिरफ्तार, गंभीर आरोपों में फंसा मामला

