Tadka ना तेल! फिर भी लोग चाटने लगते हैं उंगलियां, जानिए कैसे बनता है Chambal का फेमस भंडारे वाला Ghutma Aloo
Thursday, Feb 12, 2026-03:37 PM (IST)
ग्वालियर/चंबल (Madhya Pradesh): मध्य प्रदेश के खाने-पीने के शौकीनों के लिए घुटमा आलू एक ऐसा नाम है, जिसे सुनते ही लोगों के मुँह में पानी आ जाता है। यह सब्जी ग्वालियर, भिंड, मुरैना और दतिया के शादी समारोह, भंडारा और धार्मिक आयोजनों में पहली पसंद होती है।
क्या है खासियत?
बिना प्याज-लहसुन: इस सब्जी में कोई भी तड़का नहीं होता, फिर भी इसका स्वाद लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
तेल रहित: घुटमा आलू पूरी तरह से तेल रहित सब्जी है।
मसालेदार और चटपटी: सिर्फ देसी मसालों और उबले आलू से बनाई जाती है, जिससे स्वाद का लेवल बिल्कुल अलग होता है।
क्यों है इतना लोकप्रिय?
चंबल क्षेत्र में शादी, भंडारा या धार्मिक समारोह में 50-60 क्विंटल आलू से घुटमा आलू तैयार किया जाता है। इसका स्वाद इतना लाजवाब है कि लोग उंगलियां चाटते रह जाते हैं। पेट भरने के बाद भी मन नहीं भरता।स्थानीय हलवाई बताते हैं कि सब्जी का स्वाद उस समय के अनुपात में बेहतर होता है, जितना ज्यादा इसे पकाया जाता है। इसलिए घुटमा आलू को तैयार होने में लगभग 4-5 घंटे का समय लगता है।
बनाने की विधि
आलू को अच्छे से धोकर कड़ाई में उबाला जाता है। करीब 3 घंटे तक उबालने के बाद, इसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, हरा धनिया का पेस्ट और नमक मिलाया जाता है।ग्रेवी भी पूरी तरह से उबले हुए आलू से बनाई जाती है। कोई तेल या प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं होता, फिर भी सब्जी मसालेदार और बेहद टेस्टी बनती है।
कहावत में भी प्रसिद्ध
चंबल क्षेत्र में लोग कहते हैं:
“जो एक बार चंबल के घुटमा आलू खाता है, वह बार-बार यहां आता है।”
वास्तव में, भंडारों में लाखों लोग इसे खाने दूर-दूर से आते हैं। इसके साथ लोग पूरी, मालपुआ और खीर का आनंद भी उठाते हैं।
स्वाद का राज
घुटमा आलू का स्वाद इतना खास है कि इसे सिर्फ खाना नहीं, बल्कि अनुभव करना कहते हैं। इसकी हर बाइट में आलू की मुलायम बनावट, मसालों की खुशबू और देसी स्वाद का अद्भुत संगम होता है।यदि आप कभी ग्वालियर या चंबल क्षेत्र जाएँ, तो घुटमा आलू का स्वाद जरूर लें। यह सब्जी सिर्फ खाना नहीं, बल्कि MP की खान-पान की संस्कृति का एक अहम हिस्सा है।

