UGC कानून पर बोले शंकराचार्य सदानंद-अलग से जाति आधार पर कानून बनाने की जरूरत क्यों पड़ी ? ये झगड़ा कराने वाली बात है
Wednesday, Jan 28, 2026-11:28 PM (IST)
ग्वालियर (अंकुर जैन): देश भर में मचे UGC के नए कानून पर शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया है। ग्वालियर पहुंचे द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती इन नियमों पर नाराजगी जाहिर की है।
जाति आधार पर कानून बनाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
सदानंद सरस्वती ने कहा कि अपराधियों को सजा देने के लिए पहले से ही कानून मौजूद है फिर अलग से जाति आधार पर कानून बनाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? ऐसे कानूनों से समाज में विद्वेष और अराजकता बढ़ेगी। सदानंद सरस्वती ने कहा कि
इस कानून को लाने की ही जरूरत ही नहीं थी। ऐसे कानून लाने और झगड़े बढ़ेंगे...
द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि अपराधी तो अपराधी ही होता है। ऐसा तो नहीं है कि ब्राह्मण के लिए कानून अलग है क्षत्रिय के लिए अलग और वैश्य के लिए अलग कानून है। अपराधी किसी भी जाति का हो वो तो अपराधी ही है। इसके लिए जाति के आधार पर अलग कानून लाने की क्या जरुरत है।
प्रशासन का काम श्रद्धालुओं को स्नान की सुविधा उपलब्ध कराना है ,रोकना नहीं
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गंगा स्नान से किसी को रोका नहीं जा सकता। प्रशासन का काम रोकना नहीं बल्कि श्रद्धालुओं को स्नान की सुविधा उपलब्ध कराना है। शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि जब करोड़ों लोगों को स्नान के लिए बुलाया गया था, तब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ केवल सौ लोग थे।
ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति कर श्रद्धालुओं और साधु-संतों को सुविधा प्रदान करे। उन्होंने कहा कि यदि शंकराचार्य और अखाड़े संगम में स्नान नहीं कर पाएंगे तो माघ मेले का महत्व ही समाप्त हो जाएगा। गंगा में कहीं भी स्नान किया जा सकता है, लेकिन त्रिवेणी संगम में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है। लिहाजा UGC कानून को लेकर भी शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने नाराजगी जाहिर की है।

