सुप्रीम कोर्ट का बहुत बड़ा फैसला,ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाने पर नहीं मिलेगा SC कोटा और आरक्षण लाभ
Tuesday, Mar 24, 2026-04:40 PM (IST)
(डेस्क): देश के उच्चतम कोर्ट ने आज यानीकि मंगलवार को ऐसा फैसला दिया है जो काफी अहम है और जिसकी चर्चा खूब हो रही है। देश के सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला धर्म परिवर्तन और आरक्षित श्रेणी को लेकर आया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि हिंदू, बौद्ध, सिख धर्म के लोगों को ही अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा मिला हुआ है और अगर इस श्रेणी का कोई भी व्यक्ति किसी दूसके धर्म को अपनाता है तो उसका ये दर्जा समाप्त हो जाएगा। मतलब कि कोई भी दलित या SC कैटिगरी से आने वाला व्यक्ति अगर इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाता है तो फिर वह अनुसूचित जाति का अपना दर्जा अपने आप खो देगा.
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि किसी अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित व्यक्ति जैसे ही किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करता है, वह तुरंत और पूर्ण रूप से अपना SC दर्जा खो देता है।
क्या था आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला
तो आपको बता देते हैं कि आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को कहा था कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म में परिवर्तित होकर उसका पालन करता है, तो उसे अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जाति व्यवस्था ईसाई धर्म में नहीं पाई जाती, इसलिए ऐसे व्यक्ति को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों का लाभ लेने की अनुमति नहीं है।
दरअसल याचिकाकर्ता एक ऐसा शख्स था, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था, लेकिन वह अपने आपको अनुसूचित जाति का सदस्य बताते हुए SC/ST एक्ट के तहत लाभ मांग रहा था. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने उसकी याचिका यह कहते हुए खारिज की थी कि धर्म परिवर्तन के बाद उसे अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं दिया जा सकता.
कोर्ट ने कहा, “कोई भी वैधानिक लाभ, संरक्षण, आरक्षण जो संविधान /राज्य विधानमंडल के किसी कानून के तहत मिलता है, ऐसे व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता जो क्लॉज 3 के तहत अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाता। यह प्रतिबंध पूर्ण है और इसमें कोई अपवाद नहीं है। लिहाजा कोर्ट के इस फैसले को काफी अहम औ धर्मांतरण की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

