सरकारी आदेश को ठेंगा दिखा रहे भाजपा विधायकों के PA! CM के आदेश भी बेअसर, शिक्षा विभाग से जुड़ा बड़ा मामला
Wednesday, Jul 29, 2026-06:00 PM (IST)
रतलाम (समीर खान) : मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र से पहले 16 जिलों के 213 शिक्षकों का संलग्नीकरण (अटैचमेंट) समाप्त कर उन्हें तत्काल मूल विद्यालयों में भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं। जिसको लेकर कार्यवाही शुरू भी हो गई, लेकिन रतलाम जिले में इन आदेशों का असर दिखाई नहीं दे रहा। जावरा विधायक राजेंद्र पाण्डेय के (निजी सहायक) पीए शैलेंद्र राठौर और रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर के पीए अनिल पांचाल सहित कई शिक्षक अब भी अपने मूल स्कूलों में नहीं लौटे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन्हें अब तक वापसी के आदेश ही नहीं मिले, इस मामले में संबंधित स्कूलों ने जिला शिक्षा केंद्र को अटेचमेंट शिक्षकों की जानकारी भेज दी है लेकिन जिला शिक्षा केंद्र कार्रवाई करने में देरी कर रहा है या फिर राजनीतिक दबाव के चलते आदेशों का पालन नहीं हो पा रहा है?मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि इनको लेकर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वर्षों से विधायक कार्यालयों, मंत्रालय, कलेक्टर कार्यालय, जिला पंचायत और अन्य विभागों में अटैच शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर उनके मूल विद्यालयों में भेजा जाए, ताकि स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो।

इसके बावजूद रतलाम जिले में हालात अलग दिखाई दे रहे हैं। जानकारी के अनुसार जावरा विधायक राजेंद्र पांडेय के निजी सहायक (पीए) के रूप में कार्यरत शिक्षक शैलेंद्र राठौर जो कि रतलाम के शासकीय स्कूल में शिक्षक हैं और रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर के पीए अनिल पांचालजो मूल रूप से नगरा के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षक है, ओर अब भी अपने वर्तमान पीए के दायित्वों पर कार्यरत हैं। दोनों के मूल विद्यालयों में लौटने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
यही नहीं, जिले में ऐसे कई अन्य शिक्षक भी बताए जा रहे हैं जो विभिन्न कार्यालयों में संलग्न हैं और अब तक न तो उन्हें वापसी का नोटिस मिला है और न ही उन्होंने शासन के आदेश का पालन करते हुए अपने मूल विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण किया है।

ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या जिला शिक्षा केंद्र और शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों को अब तक रिलीविंग आदेश जारी ही नहीं किए? क्या शासन के आदेशों के क्रियान्वयन में प्रशासनिक लापरवाही हो रही है? या फिर राजनीतिक प्रभाव और दबाव के कारण कुछ मामलों में कार्रवाई टाली जा रही है? इन सवालों के जवाब फिलहाल जिला शिक्षा विभाग के पास भी हैं। मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी से जब इस संबंध में जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि सभी शिक्षकों को सूचना पत्र दे दियागया है। लेकिन अभी तक कितने शिक्षक अपने मूल स्कूल लौटे हे इसकी जानकारी नहीं है। वही विधायकों के पीए को लेकर जानकारी मांगी गई तो उनका कहना है कि इनका ऑर्डर जीएडी की तरफ से आर्डर निकला हुआ है और कलेक्टर कार्यालय की तरफ़ से भी आर्डर निकला हुआ है जिसके तहत वे अटैच हैं इनको भी नोटिस देकर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश स्तर पर सरकार ने छात्रहित को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को स्कूलों में वापस भेजने का निर्णय लिया है, लेकिन यदि रतलाम में अब भी शिक्षक कार्यालयों में ही कार्यरत हैं तो यह शासन के निर्देशों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
अब देखना होगा कि जिला शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा केंद्र शासन के आदेशों का सख्ती से पालन कर सभी संलग्न शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में भेजते हैं या फिर कुछ प्रभावशाली मामलों में कार्रवाई पहले की तरह लंबित ही रहती है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला मानसून सत्र के दौरान एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन सकता है।

