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ड्यूटी पर तैनात आरक्षक को बंदी ने मारी गोली, कमर के नीचे सटाकर लगी; गंभीर हालत में एम्स भोपाल रेफर

Wednesday, Sep 02, 2026-12:04 PM (IST)

रायसेनः जिला जेल पठारी में बुधवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे उस समय हड़कंप मच गया, जब एक बंदी ने जेल गेट पर ड्यूटी कर रहे आरक्षक दिग्विजय सिंह तोमर को कथित तौर पर अवैध देशी कट्टे से गोली मार दी। गोली जेल आरक्षक दिग्विजय तोमर की कमर के नीचे लगी। गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल रायसेन लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उसे गंभीर हालत में एम्स भोपाल रेफर कर दिया। घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में भी अफरा-तफरी मच गई। पुलिस बल के साथ अधिकारी जिला अस्पताल और जिला जेल पठारी पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी ली। कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

जेल के अंदर हथियार पहुंचने पर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला जेल पठारी में निरुद्ध बंदी के पास देशी कट्टा कैसे पहुंचा? जेल की सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हथियार बंदी तक पहुंचना जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार जेल परिसर में कब और किसके माध्यम से पहुंचा। पूरे मामले में जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों की निगरानी और जेल में आने-जाने वाली वस्तुओं की जांच भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि, जेल प्रबंधन की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। ऐसे हालात में जेल की सलाखों में कैद बंदियों की जान भी सुरक्षित नहीं है।

हत्या और जानलेवा हमले समेत कई मामले दर्ज
गोली चलाने के आरोपी बंदी नीलेश ठाकुर के खिलाफ हत्या, मारपीट और जानलेवा हमले समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। उसके खिलाफ बरेली सहित अन्य थाना क्षेत्रों में भी प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि पठारी क्षेत्र में भी आरोपी पर एक युवक की गोली मारकर हत्या करने का मामला दर्ज है। आरोपी नीलेश ठाकुर ने एक युवक के गुप्तांग में गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी थी।पुलिस अब आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और जेल में निरुद्ध किए जाने से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

पहले भी विवादों में रहा है पठारी जेल
जिला जेल पठारी पहले भी कई घटनाओं को लेकर चर्चा में रही है। सूत्रों के अनुसार पिछले करीब दो दशक में जेल के अंदर बंदियों और महिला बंदी द्वारा संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या किए जाने के मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं के बाद परिजनों ने जेल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे।अब जेल के गेट पर आरक्षक को गोली मारे जाने की घटना ने एक बार फिर जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम जांच यह होगी कि जेल में हथियार पहुंचा कैसे और क्या सुरक्षा जांच में किसी स्तर पर लापरवाही हुई।


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Content Editor

Vandana Khosla

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