MP में मंत्री से ताकतवर सचिव, मंत्री की ट्रांसफर लिस्ट को सचिव ने रोका, हेमंत खंडेलवाल की सिफारिश वाला ट्रांसफर भी नहीं किया
Tuesday, Jul 14, 2026-05:47 PM (IST)
(डेस्क): मध्य प्रदेश से ट्रांसफर मामले पर एक ऐसी खबर सामने आ रही है जो काफी हैरान करने वाली है। एक ओर जहां कांग्रेस भाजपा पर प्रदेश में ट्रांसफर माफिया की बात कहकर निशाने पर लेती है, वहीं ये खबर इस आरोप के उल्ट नजर आ रही है। एक तरफ कांग्रेस कहती है कि मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर मे मंत्री पैसे लेते हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के एक मंत्री ने ऐसा खुलासा किया है जिससे सिस्टम ही हिल जाए। भाजपा मंत्री का कहना है कि, डिपार्टमेंट के आईएएस ऑफिसर ने उनके द्वारा भेजी गई लिस्ट को ही होल्ड कर लिया। मामला यहां तक नहीं रुका इसके बाद अधिकारी ने अपनी मर्जी से दूसरी ट्रांसफर लिस्ट भी जारी कर दी। दावा तो यहां तक किया गया है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल की सिफारिश वाला ट्रांसफर भी नहीं किया गया। मंत्री के इस दावे से हडंकंप है और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा हो रही है।
मंत्री नारायण कुशवाहा और सचिव जान किंग्सली के बीच विवाद
दरअसल समाजिक न्याय और उद्यानिकी मंत्री नारायण कुशवाहा ने नोट शीट लिखकर ये आरोप लगाए हैं। सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन को लिखी नोट शीट में उद्यानिकी विभाग के सचिव पर आरोप लगाया है। कहा है कि अधिकारी ने अपनी मर्जी के ट्रांसफर किए और यहां तक की बीजेपी के 3 विधायकों की सिफारिसें भी नहीं देखी गईं।
वहीं सचिव जॉन किंग्सली ने आरोपों को नकारते हुए अपना पक्ष रखा है। उन्होंने मंत्री के कार्यालय से मिली ट्रांसफर लिस्ट को रोकने के पीछे तर्क दिया है कि उनसे चर्चा के दौरान जो लिस्ट फाइनल हुई थी वो लिस्ट मंत्री ने बदल दी। इसलिए मंत्री की ओर से भेजी लिस्ट को उन्होंने जारी नहीं किया
सचिव जॉन किंग्सली द्वारा ट्रांसफर के बदले रिश्वत मांगने का आरोप
वहीं मंत्री कुशवाहा ने नोट शीट के साथ एक व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट भी साथ लगाया है। इसमें सचिव जॉन किंग्सली द्वारा ट्रांसफर के बदले रिश्वत मांगे जाने के बारे में बताया गया है। लिहाजा इस बेहद गंभीर मामले पर लिखित शिकायत हुई है और जांच शुरू हो गई है। मंत्री कुशवाहा का कहना है कि उन्होंने सचिव जॉन किंग्सली से बातचीत करके लिस्ट फाइनल की थी। इस लिस्ट में तीन विधायक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की एक सिफारिश भी थी। कुशवाहा का कहना है कि सचिव जॉन किंग्सली ने जो लिस्ट जारी की उसके बारे में उनको पता ही नहीं था। उनकी अनुमति के बिना लिस्ट जारी कर दी गई।

