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निगम मंडलों की अगली सूची जल्द होगी जारी, चर्चा में इन पूर्व और मौजूदा विधायकों के नाम

Monday, Apr 27, 2026-05:50 PM (IST)

भोपाल : मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों में नियुक्तियों की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अभी तक कई आयोग अध्यक्षों-उपाध्यक्षों के नाम सामने आ चुके हैं। अटकलें है कि मोहन यादव सरकार जल्द ही 40 से अधिक निगम-मंडलों और अन्य आयोगों- प्राधिकरणों में लगभग डेढ़ साल से लंबित राजनीतिक नियुक्तियां की अगली सूची जारी कर सकती है। खास बात यह कि मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल की जोड़ी सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने में सक्रिय नजर आ रही है। इस रणनीति का मकसद स्पष्ट है—अनुभवी नेताओं को फिर से मुख्य भूमिका में लाना और गुटबाजी को कम करना माना जा रहा है।

इस सूची में संभावित चेहरे

सूत्रों की मानें तो अगली सूची में कई बड़े चेहरे शामिल हैं, जिनमें पूर्व मंत्रियों, कांग्रेस से आए नेताओं और विधायकों समेत कई नए नाम शामिल होने की संभावना है। जिसके बाद निश्चित ही मध्य प्रदेश की सियासत में नया रंग देखने को मिलेगा।

निगम मंडल के संभावित नाम इस तरह है-

  • युवा आयोग- प्रवीण शर्मा
  • ओरछा विकास प्राधिकरण- अखिलेष अयाची
  • वित्त विकास निगम- दीपक सक्सेना

इन्हें भी मिल सकता है मौका

  • पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया
  • पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता
  • पूर्व मंत्री कमल पटेल
  • पूर्व मंत्री रामपाल सिंह
  • अचल सोनकर
  • पूर्व मंत्री इमरती देवी
  • ​​​​​​​पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह

विधायकों को भी मिल सकता है मौका

  • विधायक अभिलाष पांडे
  • आशीष शर्मा
  • विधायक अजय विश्नोई
  • विधायक शैलेंद्र जैन
  • विधायक प्रदीप लारिया 

अब नियुक्तियों से एक तस्वीर तो साफ हो गई है कि मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाया है। अनुभवी और स्थानीय नेताओं को मौका दिया जा रहा है। इस दिशा में सबसे अहम उदाहरण जयभान सिंह पवैया की वापसी है। उन्हें वित्त आयोग की जिम्मेदारी सौंपना यह दर्शाता है कि पार्टी अब पुराने और अनुभवी चेहरों पर दोबारा भरोसा जता रही है। यह कदम केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि संगठनात्मक संदेश भी है कि पार्टी अनुभव और संतुलन दोनों को साथ लेकर चलना चाहती है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में हाल के घटनाक्रम संकेत दे रहे हैं कि लंबे समय से चली आ रही खींचतान अब धीरे-धीरे थमती दिख रही है। मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल की जोड़ी सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने में सक्रिय नजर आ रही है। इस रणनीति का मकसद स्पष्ट है—अनुभवी नेताओं को फिर से मुख्य भूमिका में लाना और गुटबाजी को कम करना।

इस दिशा में सबसे अहम उदाहरण जयभान सिंह पवैया की वापसी है। उन्हें वित्त आयोग की जिम्मेदारी सौंपना यह दर्शाता है कि पार्टी अब पुराने और अनुभवी चेहरों पर दोबारा भरोसा जता रही है। यह कदम केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि संगठनात्मक संदेश भी है कि पार्टी अनुभव और संतुलन दोनों को साथ लेकर चलना चाहती है।

 


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Content Writer

meena

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