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पुरानी है सिंधिया और केपी यादव की जंग, अब वर्चस्व और दबदबे के लिए ग्वालियर-चंबल में सियासी घमासान के तगड़े आसार

Tuesday, May 19, 2026-11:17 PM (IST)

(डेस्क): मध्य प्रदेश में महाराज सिंधिया और कभी उनके खासम खास रहे केपी यादव (KP Yadav) के बीच पुरानी अदावत एक बार फिर प्रदेश की सियासी गलियारों में चर्चा में है। बीजेपी के बीच चल ही ये दबदबे की रेस अब एक बार फिर से अलग ही दिशा पकड़ चुकी है। गुना-शिवपुरी क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व सांसद केपी यादव के समर्थकों के बीच पुरानी सियासी जंग और गुटबाजी फिर से चरम पर पहुंच चुकी है।

सोशल मीडिया पर महाराज और केपी समर्थकों में युद्ध

गौर करने वाली बात है कि  हाल ही में दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच 'दबदबे' को लेकर सोशल मीडिया पर विवादित बयानबाज़ी और 'बालक बुद्धि' जैसे शब्दों के साथ तंज कसे गए। सोशल मीडिया पर जारी जंग में खूब पार्टी निर्देशों की सीमाएं लांघी जा रही है , हालत यहां तक पहुंच चुके है कि पार्टी को दोनों खेमों  के नेताओं को नोटिस तक थमाए दिए हैं। कुछ इस्तीफे भी हुए हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि ये जंग जल्दी थमने वाली नहीं है।

केपी यादव को  राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाने के बाद जंग

दरअसल सिंधिया और केपी यादव समर्थकों के बीच इस जंग के फिर से शुरु होने के पीछे उनका अध्यक्ष बनना है। भाजपा ने प्रदेश में  निगम-मंडल में नियुक्तियां  की हैं। केपी यादव को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष  बनाए जाने के बाद से क्षेत्र में सियासी पारा और बढ़ गया है। इस पद से नवाजे जाने के बाद केपी यादव के समर्थक उत्साहित है।

साल 2019 के चुनाव हैं विवाद की  जड़

दरअसल  हालिया विवाद और राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से बात करें तो सिंधिया और केपी यादव के टकराव की जड़ साल 2019 के लोकसभा चुनाव हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव मे  केपी यादव ने BJP टिकट पर चुनाव लड़ते हुए महाराज सिंधिया को हराकर सनसनी फैला दी थी। तब सिंधिया ने कांग्रेस में थे और ज्योतिरादित्य सिंधिया को गुना सीट पर केपी यादव ने करारी शिकस्त दी थी। यही शिकस्त दोनों गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई और दबदबा को लेकर आज भी बरकरार है। हालांकि हालिया विवाद पर अभी तक ज्योतिरादित्य सिंधिया का कोई बयान सामने नहीं आया है।


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Content Editor

Desh Raj

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