सरकार के खिलाफ भोपाल में महाआंदोलन! आउटसोर्स, अस्थायी कर्मियों ने उठाया समान वेतन का मुद्दा, लाखों कर्मचारियों की जुटी भीड़
Sunday, Oct 12, 2025-02:30 PM (IST)
भोपाल: मध्य प्रदेश के बैंक मित्र, पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, अंशकालीन भृत्य, राजस्व सर्वेयर, आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारी रविवार को तुलसी नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में एक मंच पर एकत्रित हुए और 'महाक्रांति रैली' के तहत प्रदर्शन किया। सभी संगठनों ने मिलकर प्रदेश में अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन, कामकाज और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों को उठाया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रदेश में सरकारी व्यवस्थाएं अब स्थायी कर्मचारियों की बजाय अस्थायी आउटसोर्स कर्मियों द्वारा चलाई जा रही हैं। बैंक सेवा केंद्रों, पंचायतों और प्रमुख सरकारी भवनों जैसे सीएम राइज स्कूल, वल्लभ भवन और सतपुड़ा भवन में नियुक्तियां आउटसोर्स कर्मचारियों के जरिए की जा रही हैं। पंचायतों में चौकीदारों को मात्र ₹3,000 प्रति माह वेतन मिलता है, जो समय पर भी नहीं मिलता। रामनिवास केवट, जो पिछले 25 साल से ग्राम पंचायत में चौकीदारी कर रहे हैं, ने बताया कि उनका वेतन अब भी केवल ₹2,000 प्रति माह है और कई बार भुगतान 5–6 महीने तक विलंबित होता है। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है, और कई बार खाने-पीने में भी संकट आता है।
महाक्रांति रैली के संयोजक वासुदेव शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 19 अगस्त 2025 के फैसले (सिविल अपील क्रमांक 8558/2018) ने यह स्पष्ट किया है कि लंबे समय से कार्यरत अस्थायी, संविदा और आउटसोर्स कर्मियों से कम वेतन पर समान कार्य लेना 'श्रमिक शोषण' है। न्यायालय ने समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ का संवैधानिक अधिकार माना है। मोर्चा का कहना है कि यह फैसला प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के लिए “न्याय की नई उम्मीद” लेकर आया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से न्यूनतम वेतन ₹21,000 प्रति माह करने और लंबित वेतन के भुगतान की तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

