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कांग्रेस के 62 विधायकों की एकजुटता से घबराई BJP? मीनाक्षी नटराजन विवाद पर कांग्रेस नेताओं ने खोले कई बड़े राज

Saturday, Jun 13, 2026-04:17 PM (IST)

भोपाल। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला अब केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। राजधानी भोपाल में आयोजित कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार बताते हुए भाजपा और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए।

प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर आयोजित इस संवाददाता सम्मेलन में नेताओं का आक्रोश साफ दिखाई दिया। उनका आरोप था कि जिस लोकतंत्र की रक्षा के लिए संवैधानिक संस्थाओं का निर्माण किया गया था, आज उन्हीं संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन जैसी गांधीवादी और बेदाग छवि वाली नेता का नामांकन रद्द होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरा धब्बा है।

जिला कांग्रेस कमेटी के प्रभारी मनोज राजानी ने कहा कि आज हालात ऐसे बन गए हैं कि न्याय की उम्मीद लेकर जिस चौखट पर जाया जाता है, वहीं से अन्याय लौटाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, ईडी, आयकर विभाग और पुलिस जैसी संस्थाओं का राजनीतिक उपयोग किया जा रहा है, जिसका असर आने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में भी दिखाई दे सकता है।

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि मीनाक्षी नटराजन राज्यसभा पहुंच भी जातीं, तब भी प्रदेश की सत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता। ऐसे में उनके नामांकन को निरस्त करने की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक दुर्भावना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। राजानी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या देश में भाजपा और विपक्षी दलों के नेताओं के लिए अलग-अलग मानदंड लागू किए जा रहे हैं?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी तीखे तेवर अपनाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 62 विधायकों की एकजुटता भाजपा को असहज कर रही थी और इसी वजह से यह पूरा घटनाक्रम सामने आया। शर्मा ने दावा किया कि अब कांग्रेस इस मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाएगी और सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।

राजनीतिक गलियारों में इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चाएं तेज हैं। एक ओर कांग्रेस इसे लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े पक्ष इसे नियमों के तहत हुई कार्रवाई मान रहे हैं। हालांकि इतना तय है कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद ने मध्यप्रदेश की राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में और तेज सुनाई दे सकती है।


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Content Editor

Himansh sharma

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