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गर्ल्स कॉलेज की स्टूडेंट्स से टेस्ट पेपर में पूछे ऐसे सवाल, जवाब देने में आने लगी शर्म, हंगामे के बाद पर्चा किया रद्द

12/9/2022 8:18:51 PM

खंडवा(निशात सिद्दीकी): मध्यप्रदेश के खंडवा में माखनलाल चतुर्वेदी गर्ल्स कॉलेज के एग्जाम पेपर में विवादित सवाल पूछने पर हंगामा हो गया। दरअसल गर्ल्स कॉलेज में फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट्स से पर्सनालिटी डेवलपमेंट सब्जेक्ट का टेस्ट लिया गया। इस टेस्ट में स्टूडेंट्स से आपत्तिजनक सवाल पूछे गए। इन सवालों में पूछा गया कि क्या मुझे कभी-कभी यह चिंता हो जाती है कि कहीं मैं नपुसंक न हो जाऊं। या विपरित लिंग के व्यक्ति से मिलने पर मुझे कुछ घबराहट सी मालूम होती है। सिलेबस से हटकर सेक्स लाइफ से जुड़े सवाल के जवाब हां और ना में देने थे। टेस्ट के बाद स्टूडेंट्स ने कॉलेज प्रिंसिपल से इस तरह के सवाल पूछे जाने की शिकायत की।  मामला बढ़ता देख गर्ल्स कॉलेज के प्रिंसिपल ने तुरंत टेस्ट रद्द करने के आदेश दे दिए। लकिन कॉलेज प्राचार्य का कहना है, मनोविज्ञान में इन प्रश्नों का जिक्र है।

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खंडवा में गर्ल्स कॉलेज में फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट्स से पर्सनालिटी डेवलपमेंट सब्जेक्ट के टेस्ट में आपत्तिजनक सवाल पूछे जाने के बाद मामला गर्मा गया। आपत्तिजनक सवालों की लेकर गर्ल्स कॉलेज स्टूडेंट्स ने कॉलेज प्रिंसिपल से इस तरह के सवाल पूछे जाने की शिकायत दर्ज कराई। हालांकि कॉलेज प्राचार्य का कहना है, मनोविज्ञान में इन प्रश्नों का जिक्र है। लेकिन मामला बढ़ता देख कॉलेज प्राचार्य तुरंत टेस्ट रद्द करने के आदेश दे दिए।

 पेपर में इस तरह के सवाल पूछे गए जिन पर छात्राओं ने ली आपत्ति

1. मुझे कभी-कभी यह चिंता हो जाती है कि कहीं मैं नपुसंक न हो जाऊं।

2. विपरित लिंग के व्यक्ति से मिलने पर मुझे कुछ घबराहट सी मालूम होती है।

3. बुढ़ापे से शारीरिक शक्ति के क्षीण होने की संभावना मुझे सताया करती है।

4. कभी-कभी मैं यह सोचकर परेशान हो जाता हूं कि क्रोध में मैं किसी की हत्या न कर दूं या भारी नुकसान न पहुंचा दूं।

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इन सवालों के पूछे जाने पर छात्राओं ने आपत्ति लेते हुए लिखित में गर्ल्स कॉलेज प्राचार्य से शिकायत कराई । छात्राओं का कहना है कि व्यक्तित्व विकास के विषय में सायकॉलोजी की एक बुक से सवाल लिए गए, जो कि सिलेबस के हटकर तो है साथ में क्लिनिकल है। यानी कि यह एक क्लिनिकल टेस्ट के प्रश्न होते है, जो मरीजों से पूछे जाते है। इन प्रश्नों में इतने आपत्तिजनक और अश्लील सवाल है। जिनके जवाब देने में भी शर्म आ रही है। यह छात्राओं की गरिमा के खिलाफ है। छात्राओं ने कहा कि, पूरा टेस्ट सिलेबस से अलग है। फर्स्ट ईयर की कई छात्राओं की उम्र 18 वर्ष से भी कम है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि कॉलेज में व्यक्तित्व विकास का विषय अयोग्य व असक्षम प्रोफेसर्स से पढ़वाया जा रहा है। जो कि अनुचित है। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन से इस प्रश्न-पत्र को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए।

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जिस पुस्तक से गर्ल्स कॉलेज के स्टाफ ने यह सवाल लिए है, वह रुपा साइकॉलोजिकल सेंटर वाराणसी से प्रकाशित  है। इनमे पब्लिशर्स ने लिखा कि टेस्टबुक में 10 क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, उपस्थिति और चोट, महत्वाकांक्षा का क्षेत्र, पारिवारिक चिंताएं, दोस्ती और प्रेम संबंधी चिंताएं, सामाजिक संबंध और अनुमोदन, भविष्य की चिंताएं, सभ्यता की चिंताएं, युद्ध, सदाचार, अपराध और शर्म, शारीरिक और शारीरिक अभिव्यक्तियां और मनोवैज्ञानिक अभिव्यक्तियां शामिल है। टेस्टबुक में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग प्रतिशत मानदंड उपलब्ध हैं। 19 से 24 वर्ष आयु समूह का होना अनिवार्य है। छात्राओं ने शिकायत में इस बात का जिक्र भी किया कि, टेस्ट पेपर के लिए उन्हें रुपा साइकोलॉजिकल सेंटर की बुक के 8 पृष्ठ थमा दिए गए। कहा गया कि, इन 8 पन्नों की फोटोकॉपी उन्हें खुद ही करानी पड़ेगी। फर्स्ट ईयर की 500 से ज्यादा छात्राओं ने अपने खर्च से टेस्ट पेपर के लिए फोटोकॉपी कराई।

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कॉलेज प्राचार्य डॉ. एके जैन का बताया कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत व्यक्तित्व विकास विषय पाठ्यक्रम में शामिल है। जिसे किसी भी संकाय का स्टूडेंट्स वोकेशनल कोर्स के रूप में सिलेक्ट कर सकता है। आंतरिक मूल्यांकन के लिए प्रश्न-पत्र को साइकोलॉजी विभाग ने तैयार किया है। जो प्रश्न पूछे गए हैं, वह विषय आधारित है। प्राचार्य डॉ. एके जैन का कहा कि मेरी टेबल पर एक शिकायती आवेदन मिला है। जिसमें कुछ छात्राओं ने प्रश्न-पत्र पर आपत्ति जाहिर की। इसलिए मैंने तत्काल उस प्रश्न पत्र को रद्द करने के निर्देश दिए।


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Content Writer

meena

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