छिंदवाड़ा हादसे को लेकर सरकार पर बरसे सिंघार! पूछे तीखे सवाल, मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान
Saturday, Mar 28, 2026-01:18 PM (IST)
भोपाल (इजहार खान) : भोपाल में मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने “छिंदवाड़ा बस हादसा” और “देश-प्रदेश में LPG संकट” पर प्रेस वार्ता कर सरकार की गंभीर नाकामियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेश में नागरिकों की जान की सुरक्षा खतरे में है, वहीं दूसरी ओर देश को ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं के संकट में धकेल दिया गया है।
1. छिंदवाड़ा बस हादसा - प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का अभाव
एक हादसा, जिसने कई घरों की रोशनी बुझा दी। 26 मार्च को शाम 7 बजे छिंदवाड़ा–नागपुर मार्ग पर एक दर्दनाक बस दुर्घटना हुई। इस हादसे में 10 लोगों की मौत और लगभग 40 लोग घायल हुए। किसी मां ने अपना बेटा खोया, किसी बच्चे ने अपने पिता को — यह क्षति अपूरणीय है। नेता प्रतिपक्ष ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। कांग्रेस विधायक दल की ओर से प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की सभा थी, लेकिन जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे थी और मुख्यमंत्री की सभा से लौट रही बस हादसे का शिकार हो गई। ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि महिलाओं पर दबाव बनाकर उन्हें कार्यक्रम में ले जाया गया —यह कहा गया कि नहीं जाने पर ‘लाड़ली बहन योजना’ के पैसे बंद हो सकते हैं।
क्या सरकार इसकी जांच कराएगी कि किन अधिकारियों या कार्यकर्ताओं ने यह दबाव बनाया?
- प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति अत्यंत गंभीर है।
- मध्यप्रदेश देश में सड़क दुर्घटनाओं में दूसरे स्थान पर है।
- पिछले पांच वर्षों में 65,214 लोगों की मृत्यु सड़क हादसों में हुई है।
- वर्ष 2024 में ही 14,791 लोगों ने जान गंवाई।
मुआवज़ा मॉडल — असमानता और नीति का अभाव
हर हादसे के बाद सरकार तत्काल मुआवज़े की घोषणा करती है, लेकिन कोई Uniform Compensation Policy नहीं है। न पीड़ितों की स्थिति का समुचित आकलन होता है, न संवेदनशीलता दिखाई जाती है।
पिछली घटनाओं में मुआवज़े की स्थिति:
- भागीरथपुरा दूषित पानी कांड — ₹2 लाख
- छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड — ₹4 लाख
- एम.वाय. अस्पताल चूहा कांड — ₹5 लाख
- छिंदवाड़ा बस हादसे में अब सरकार ने ₹8 लाख प्रति मृतक का मुआवज़ा घोषित किया है।
- जबकि शुरुआत में स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा केवल ₹4 लाख की घोषणा की गई थी।
- सवाल: मुआवज़े में यह असमानता और बदलाव क्यों?
मुआवज़ा — घोषणा से हकीकत तक एक लंबा संघर्ष
- घोषणा के बाद मुआवज़ा प्राप्त करना भी एक जटिल प्रक्रिया बन जाती है।
- पीड़ित परिवारों से बार-बार दस्तावेज मांगे जाते हैं, फाइलें विभागों में घूमती रहती हैं।
- प्रदेश में कोई Single Window Clearance System नहीं है।
- कई मामलों में आज तक पूर्ण मुआवज़ा नहीं मिला:
- भागीरथपुरा दूषित पानी कांड
- छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड
देश-प्रदेश में LPG संकट — नीतिगत विफलता और प्रशासनिक अक्षमता
देश में डर और अफरा-तफरी का माहौल
- आज पूरे देश में बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
- LPG के लिए पहले से लंबी कतारें थीं, अब पेट्रोल-डीजल की भी bulk buying हो रही है।
- कई जगहों से ईंधन खत्म होने की खबरें सामने आ रही हैं।
लाइन में लगाना — सरकार की पहचान
- नोटबंदी में बैंक की लाइन
- कोरोना में ऑक्सीजन की लाइन
- अब LPG, पेट्रोल और डीज़ल की लाइन
- यह सरकार समाधान नहीं देती, बल्कि जनता को लाइनों में खड़ा कर देती है।
रसोई से उद्योग तक — LPG संकट का व्यापक असर
- देश में लगभग 33 करोड़ LPG घरेलू कनेक्शन हैं।
- मध्यप्रदेश में करीब 1.75 करोड़ परिवार LPG पर निर्भर हैं।
- करोड़ों परिवार रोजमर्रा की जरूरतों के लिए LPG पर निर्भर हैं।
- पिछले 20 दिनों से देशभर में commercial LPG उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं मिले।
- होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर हैं।
अंतरराष्ट्रीय नहीं, नीतिगत असफलता
- भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है।
- देश अपनी कुल LPG खपत का लगभग 60% आयात करता है।
- 80–90% आयात Strait of Hormuz के रास्ते से होते हैं।
खतरा पहले से स्पष्ट था, फिर भी केंद्र सरकार ने:
- Energy diversification नहीं बढ़ाया
- Strategic reserves पर्याप्त नहीं बढ़ाए
- West Asia में proactive diplomacy नहीं दिखाई
- आज देश इस नीतिगत विफलता की कीमत चुका रहा है।
उज्ज्वला योजना — प्रचार बनाम हकीकत देश में 10.33 करोड़ उज्ज्वला लाभार्थी हैं।
- मध्यप्रदेश में 88 लाख लाभार्थी हैं।
- LPG को लेकर बड़े स्तर पर प्रचार किया गया।
- लेकिन आज सिलेंडर आम जनता को उपलब्ध नहीं है।
- सवाल: क्या सरकार श्रेय लेने की तरह जिम्मेदारी भी लेगी?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा: “यह सरकार न जनता की जान बचा पा रही है, न रसोई जला पा रही है।”
- सड़कें असुरक्षित हैं
- रसोई संकट में है
- मुआवज़ा व्यवस्था असंवेदनशील है
यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जनता के जीवन और अधिकारों के प्रति सरकार की स्पष्ट उदासीनता का प्रमाण है।

