आयुष्मान योजना में बड़ा गड़बड़ घोटाला! फाइलों में फर्जी एंट्री कर वसूले जा रहे पैसे, 2 अस्पतालों के खिलाफ बड़ा एक्शन
Thursday, Oct 01, 2026-03:45 PM (IST)
रायपुर : छत्तीसगढ़ में आयुष्मान कार्ड के माध्यम से कथित फर्जी इलाज और मरीजों से अतिरिक्त राशि लिए जाने की शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के विभिन्न जिलों के 17 अस्पतालों में एक साथ जांच की है। जांच के लिए 52 अधिकारियों की 17 अलग-अलग टीमें गठित की गई थीं। स्वास्थ्य विभाग से आज मिली जानकारी के अनुसार विभाग की टीमों ने बुधवार को चिन्हांकित अस्पतालों में पहुंचकर मरीजों की भर्ती, उपचार और आयुष्मान योजना से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की। जांच के दायरे में रायपुर के सात, बिलासपुर के तीन, दुर्ग के दो तथा सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के एक-एक अस्पताल को शामिल किया गया। बताया गया है कि आयुष्मान योजना के तहत फर्जी इलाज और मरीजों से अतिरिक्त राशि वसूले जाने को लेकर प्रकाशित खबर के बाद विभाग ने यह कारर्वाई की।
जांच को गोपनीय रखने के लिए 17 टीमों में शामिल 52 अधिकारियों को सुबह करीब 10 बजे मौके पर ही बताया गया कि उन्हें किस शहर के किस अस्पताल में जांच के लिए जाना है। जांच के दौरान कई अस्पतालों में मरीजों की भर्ती और उनके उपचार से जुड़े रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आने की बात कही गई है। कुछ अस्पतालों में ऐसे मरीज भर्ती पाए गए, जिनसे संबंधित रिकॉर्ड अस्पताल प्रबंधन तत्काल उपलब्ध नहीं करा सका। कुछ मरीजों को आईसीयू में भर्ती बताया गया, लेकिन उनकी भर्ती से संबंधित दस्तावेज और फाइल मौके पर नहीं मिली। कई स्थानों पर मरीजों की फाइल उपलब्ध कराने में 10 से 15 मिनट लगे, जबकि भर्ती मरीज की फाइल उसके बेड के पास उपलब्ध रहनी चाहिए।
जांच के दौरान वरदान अस्पताल के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई। यहां 28 सितंबर की सुबह कुछ ही समय के अंतराल में 19 मरीजों को डिस्चार्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें एक मरीज महासमुंद और 18 ओडिशा के बताए गए। वहीं 30 सितंबर को जांच के दौरान अस्पताल में करीब 20 मरीज भर्ती मिले, जिनमें आयुष्मान योजना के तहत केवल सात मरीज भर्ती पाए गए। टीम को कुछ ऐसे मरीज भी मिले, जिन्हें सामान्य दर्द जैसी शिकायतों के बाद भर्ती किया गया था। जांच टीम के अनुसार इनमें से कुछ मरीजों की स्थिति ऐसी नहीं थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता हो। जांच के आधार पर मेडिलाइफ सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल का नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीयन निरस्त करने और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं लोटस हॉस्पिटल एंड एडवांस यूरोलॉजी सेंटर को आगामी आदेश तक आयुष्मान योजना से डी-एम्पैनल कर दिया गया है। जांच में मरीजों से अतिरिक्त राशि लेने की पुष्टि का भी उल्लेख किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त संचालक इंद्रजीत बर्मन ने कहा कि जिन अस्पतालों से ज्यादा शिकायतें मिली थीं, वहां कारर्वाई की गई है। लोटस और मेडिलाइफ पर कारर्वाई हो चुकी है, जबकि जांच अभी जारी है।
अधिकारियों के अनुसार जांच के दायरे में आए अधिकतर अस्पतालों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। संबंधित टीमों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद आगे की कारर्वाई की जाएगी। जांच के दौरान ओडिशा सरकार की बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना से संबंधित मामलों में भी कथित फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आई है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाती है। छत्तीसगढ़ के कुछ अस्पतालों में भी पात्र मरीजों को इसके तहत उपचार की सुविधा मिलती है। मरीज की पात्रता और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के आधार पर योजना का लाभ दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ की पुरानी मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था, जिसे बाद में केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना से जोड़ा गया। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को आयुष्मान कार्ड दिया जाता है। प्रदेश में अब आयुष्मान कार्ड अथवा ई-कार्ड के माध्यम से पंजीकृत अस्पतालों में योजना के तहत उपचार की सुविधा उपलब्ध है।

