Punjab Kesari MP ads

बिना नंबर प्लेट की गाड़ी से MP पहुंची राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, जानिए इसके पीछे की वजह

Thursday, Jun 18, 2026-08:49 PM (IST)

बैतूल (रामकिशोर पंवार) : भारत में अग्रेंजों के द्वारा मराठों से हुई संधी के बाद 15 मई 1822 में बने बैतूल जिले में बीते 204 सालों में पहली बार कोई देश - परेदश का राष्ट्रध्यक्ष (राष्ट्रपति) गुरूवार 18 जून 2026 को आ रहा है। सूर्यपुत्री ताप्ती नदी के किनारे मौजूद रानी पठार एवं विक्टोरिया फाल को लेकर ऐसी लोककथाएं आम प्रचलन में रही थी कि रानी विक्टोरिया बैतूल आई थी। हाथियों के लाव लश्कर के संग गुप्त प्रवास पर बैतूल आई रानी विक्टोरिया के हाथी के पांव से पत्थरों से बने हाथी खर को भी रानी विक्टोरिया से जोड़ कर देखा जाता है। हालांकि बैतूल गजेटियर इस बात की पुष्टि नहीं करता है।

इस बार देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रध्यक्ष (राष्ट्रपति) भारतीय सेना के हेलीकाप्टर से बैतूल आ रही है। महामहीम राष्ट्रपति के बैतूल दौरे को लेकर एक सनसनी खेज खबर यह है कि महामहीम को लाने - ले जाने वाला वाहन कहां का होगा..? आमतौर पर किसी भी वाहन को सड़क पर चलने के लिए उस वाहन का रजिस्ट्रेशन और आरटीओ नंबर होना अनिवार्य है। इसके बिना सड़क पर वाहन नहीं चलाया जा सकता है। यदि आप ऐसा करते हैं, तो कानूनी रूप से आपके खिलाफ चालानी कार्रवाई होगी या फिर आपको जुर्माना देना पड़ सकता है। लेकिन आज गुरूवार 18 जून को बैतूल एक कार्यक्रम में शिरकत करने आ रही देश की राष्ट्रपति श्रीमति द्रौपदी मुर्मू हेलीपैड वाले स्थल मिलानपुर से बैतूल के कार्यक्रम स्थल लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम तक बिना नंबर प्लेट की स्पेशल गाड़ी से यह आना - जाना करेगी। इसके पीछे की वजह यह नहीं है कि सरकार और प्रशासन के पास रजिस्ट्रेशन और आरटीओ नंबर प्लेट वाली स्पेशल गाड़ी नहीं है बल्कि यह एक प्रोटोकॉल के तहत होता है और इसके पीछे की एक अहम वजह राष्ट्रपति का देश का प्रथम नागरिक होना और उनके सम्मान को बनाए रखना होता है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है।

PunjabKesari

दरअसल यह व्यवस्था ब्रिटिश कालीन शासन काल से ही चली आ रही है। यह माना जाता है कि राजा (राष्ट्रध्यक्ष/राष्ट्रपति) कभी कोई गलत काम नहीं कर सकता, यह उन्हें सम्मान देने के लिए उनकी गाड़ी में नंबर प्लेट नहीं होती है, वे बिना नंबर प्लेट लगी हुई गाडिय़ों से ही विभिन्न कार्यक्रमों के लिए सफर करती है। राष्ट्रपति की गाड़ी में नंबर प्लेट की जगह सोने की परत से बना हुआ अशोक स्तंभ होता है, जो नंबर प्लेट की जगह लगा होता है। राष्ट्रपति के काफिले में करीब 14 वाहन होते हैं। राष्ट्रपति के बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ी से चलने की कुछ वजह सुरक्षा कारण भी बताए जाते है। इसके अलावा भी कुछ प्रमुख कारण है, जो राष्ट्रपति को सम्मान देने की वजह से ऐसे हैं। बहरहाल बैतूल आ रही राष्ट्रपति के लिए स्टेडियम दुल्हन की तरह सज चुका है। कार्यक्रम की तैयारियां पूरी हो चुकी है। बैतूलवासियों की गुरूवार को राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात भी होगी और वह उन्हें सुरक्षा व्यवस्था के साथ बिना नंबर प्लेट लगी गाड़ी से आते हुए भी देख सकेंगे।

यह परंपरा ब्रिटिश काल के सिद्धांत द किंग कैन डू नो रॉन्गस (राजा कभी कोई गलत काम नहीं कर सकता) से प्रेरित है। इसके अनुसार, देश के प्रमुख पर कोई भी कानूनी मुकदमा या आम नियम लागू नहीं होते। सुरक्षा और विशिष्टतारू भारत के राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक और तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर होते हैं। उन्हें देश में सर्वोच्च वरीयता प्राप्त होती है। राष्ट्रीय गरिमा का प्रतीक उनकी गाड़ी पर सामान्य नंबर प्लेट की जगह अशोक स्तंभ का होना इस पद की गरिमाए संप्रभुता और राष्ट्र के सर्वोच्च नेतृत्व को दर्शाता है। राष्ट्रपतियों की गाडिय़ों के अलावाए उपराष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों की आधिकारिक गाडिय़ों पर भी सामान्य नंबर प्लेट नहीं होतीए और उन पर भी राष्ट्रीय प्रतीक का ही इस्तेमाल किया जाता है। भारत के राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर होते हैंए इसलिए उनकी आधिकारिक गाड़ी पर कोई नंबर प्लेट नहीं होती। इसके बजायए लाइसेंस नंबर वाली जगह पर सोने की परत से उकेरा हुआ राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ) लगा होता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

meena

Related News