विजयवर्गीय ने 28 साल की परंपरागत बजरबट्टू सम्मेलन से बनाई दूरी! क्या सच में MP में कुछ बड़ा होने वाला है? सियासी अटकलें तेज

Friday, Mar 06, 2026-02:01 PM (IST)

इदौर (सचिन बहरानी) : इंदौर में रंगपंचमी की पूर्व संध्या पर होने वाला 28 साल पुराना पारंपरिक “बजरबट्टू सम्मेलन” इस बार निरस्त हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण माने जाने वाले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इसमें शामिल नहीं हो रहे थे।

क्या है बजरबट्टू सम्मेलन और क्यों खास है

  • इंदौर में रंगपंचमी से एक दिन पहले हर साल यह हास्य-व्यंग्य कार्यक्रम आयोजित होता रहा है।
  • करीब 28 साल से यह परंपरा चली आ रही थी।
  • इसकी खास पहचान यह रही कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हर साल अलग-अलग गेटअप में मंच पर आते थे और वही कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण होते थे।

यानी यह सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इंदौर की लोकल राजनीति और सामाजिक नेटवर्किंग का मंच भी माना जाता रहा है।

इस बार क्यों निरस्त हुआ कार्यक्रम

आयोजकों के अनुसार, विजयवर्गीय के शामिल न होने के कारण सम्मेलन निरस्त करना पड़ा। बताया जा रहा है कि भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के बाद मंत्री ने सार्वजनिक आयोजनों से दूरी बना ली है। इसी कारण वे फाग उत्सव जैसे अन्य कार्यक्रमों में भी नहीं पहुंचे। इसके अलावा कुछ रिपोर्टों में मेट्रो निर्माण के कारण जगह की समस्या भी एक कारण बताई गई है।

विजयवर्गीय की दूरी के सियासी मायने

(1) छवि बचाने की कोशिश

भागीरथपुरा जलकांड और प्रशासनिक आलोचना के बाद विजयवर्गीय सार्वजनिक मंचों से दूरी बनाकर राजनीतिक नुकसान कम करने की रणनीति अपना रहे हैं।

(2) स्थानीय राजनीति में संदेश

इंदौर की राजनीति में विजयवर्गीय बेहद प्रभावशाली नेता हैं। उनका किसी कार्यक्रम में न जाना यह संकेत देता है कि

  • मामला संवेदनशील है
  • सरकार या प्रशासन पर दबाव है
  • राजनीतिक माहौल अनुकूल नहीं है।

(3) सत्ता और संगठन के समीकरण

हाल के दिनों में प्रदेश की कुछ बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों से दूरी को लेकर भी अटकलें लगती रही हैं कि पार्टी के अंदरूनी समीकरण बदल रहे हैं। खासकर मंत्रीमंडल विस्तार की अटकलों के बीच उनका दिल्ली दौरा। कयास लगाए जा रहे हैं कि हाईकमान उनसे नाराज चल रहा है और जल्द ही बड़ा बदलाव हो सकता है।

(4) सांस्कृतिक आयोजनों का राजनीतिक प्रभाव

इंदौर में रंगपंचमी और उससे जुड़े आयोजन अक्सर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच भी होते हैं। ऐसे में बड़े नेताओं का दूरी बनाना सीधे-सीधे राजनीतिक संदेश माना जाता है।

कहा जा सकता है कि बजरबट्टू सम्मेलन का निरस्त होना केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम रुकना नहीं है। यह इंदौर की स्थानीय राजनीति में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की रणनीतिक दूरी, प्रशासनिक विवादों और बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत भी माना जा रहा है।


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meena

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