दतिया की सजा भांडेर-सेवढ़ा को क्यों? हमारा क्या कसूर, भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश
Wednesday, Aug 05, 2026-09:24 PM (IST)
सेवढ़ा/दतिया (राघवेन्द्र सिंह यादव) : दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद दतिया जिला कार्यकारिणी भंग होने के बाद सेवढ़ा और भांडेर के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सबसे ज्यादा आहत है। सबका एक ही सवाल है - भीतरघात अगर दतिया में हुआ तो सजा भांडेर और सेवढ़ा को क्यों?
"हमारी क्या गलती थी" - कार्यकर्ताओं का सवाल
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने दतिया के साथ-साथ सेवढ़ा और भांडेर विधानसभा की पूरी कार्यकारिणी भी भंग कर दी लेकिन जमीनी कार्यकर्ता इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे। सेवढ़ा और भांडेर के पदाधिकारी खुलकर सामने नहीं आ रहे, पर अंदर ही अंदर अंतर्कलह और नाराजगी साफ दिख रही है।
कार्यकर्ताओं का कहना है
"अगर दतिया में भीतरघात हुआ है तो वो दतिया के पदाधिकारियों ने किया। इसमें भांडेर और सेवढ़ा का क्या दोष? दतिया विधानसभा के लोगों की गलती की सजा हमें देना कहां तक उचित है?"
सेवढ़ा और भांडेर में अंदरूनी आक्रोश बढ़ रहा
कार्यकर्ताओं में यह भाव है कि अगर भीतर घात हुआ है तो दतिया विधानसभा के पदाधिकारियों द्वारा किया गया लेकिन पार्टी ने "एक की गलती की सजा तीनों को" दे दी। उनका तर्क है कि उपचुनाव की जिम्मेदारी जिन 6 मंडलों पर थी वो सिर्फ दतिया विधानसभा के थे। ऐसे में बिना कारण बताए पूरे जिले के साथ-साथ दो अन्य विधानसभा की टीम तोड़ देना कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने जैसा है।
इस बीच भंग किए गए जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाहा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा "हमने पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के साथ शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम किया है। ऑडियो-वीडियो के माध्यम से भ्रम फैलाया जा रहा है कि हमने भीतरघात किया। अगर सबूत हैं तो सामने लाए जाएं। बिना पत्र और बिना कारण बताए कार्यकारिणी भंग करना कार्यकर्ताओं को हताश करना है। वर्षों की मेहनत का ये परिणाम उचित नहीं है।"
पार्टी की मजबूरी या संदेश?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी ने ये कदम "भविष्य में भीतरघात रोकने" के लिए उठाया है। नेतृत्व नहीं चाहता कि दतिया जैसी स्थिति सेवढ़ा और भांडेर में भी बने। इसीलिए नरोत्तम खेमे से जुड़े माने जाने वाले सभी पदों को एक साथ हटाया गया। लेकिन इस कार्रवाई से सेवढ़ा-भांडेर के वफादार कार्यकर्ताओं में निराशा है। उनका कहना है कि चुनाव हारा दतिया, और दंड मिला पूरे जिले को। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए सिरे से संगठन खड़ा करने के साथ-साथ भांडेर और सेवढ़ा के नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की भी होगी।

