नरोत्तम मिश्रा के लिए क्यों सबसे अहम है दतिया उपचुनाव? क्या 3 अगस्त के बाद BJP में फिर बढ़ेगा नरोत्तम का कद?
Friday, Jul 31, 2026-07:02 PM (IST)
भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव का मतदान संपन्न हो चुका है और अब पूरे प्रदेश की नजर 3 अगस्त को आने वाले परिणाम पर टिकी है। यह चुनाव केवल एक विधायक चुनने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक प्रभाव, संगठन में उनकी भूमिका और भविष्य की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव भी बन गया है।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस उपचुनाव का परिणाम सीधे तौर पर डॉ. मिश्रा की सियासी स्थिति को प्रभावित करेगा। भाजपा ने इस बार उन्हें टिकट न देकर आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया, लेकिन इसके बावजूद डॉ. मिश्रा पूरे चुनाव अभियान में सक्रिय रहे और पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में पूरी ताकत से मैदान में उतरे। यही वजह है कि चुनाव परिणाम को उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक स्वीकार्यता के पैमाने के रूप में भी देखा जा रहा है।
जीत हुई तो बढ़ेगा कद, हार हुई तो उठेंगे सवाल
यदि भाजपा दतिया सीट जीतने में सफल रहती है तो इसे संगठन के प्रति डॉ. मिश्रा की प्रतिबद्धता और उनके प्रभाव का प्रमाण माना जाएगा। इससे पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर नई संभावनाएं खुल सकती हैं। वहीं यदि भाजपा को हार का सामना करना पड़ता है तो विरोधी दल ही नहीं, राजनीतिक विश्लेषक भी उनके पारंपरिक गढ़ में उनकी पकड़ को लेकर सवाल उठा सकते हैं।
टिकट नहीं मिला, फिर भी नहीं छोड़ी पार्टी लाइन
उपचुनाव की घोषणा के बाद यह माना जा रहा था कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा स्वयं दावेदारी पेश करेंगे, लेकिन पार्टी ने अलग चेहरा मैदान में उतारा। टिकट वितरण के बाद समर्थकों की नाराजगी जरूर सामने आई, लेकिन डॉ. मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले का सम्मान किया और किसी भी तरह के विरोध से दूरी बनाए रखी। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने लगातार भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में जनसंपर्क किया और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश की।
2028 की रणनीति से भी जुड़ा है यह चुनाव
भाजपा के भीतर यह चर्चा भी है कि यदि पार्टी को भविष्य में ग्वालियर-चंबल अंचल में अपना प्रभाव मजबूत बनाए रखना है तो डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे अनुभवी नेता की भूमिका को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। ऐसे में दतिया का परिणाम यह संकेत भी देगा कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन उन्हें किस जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाता है।
बड़े दावे, बड़ी चुनौती
मतदान के बाद डॉ. मिश्रा ने भाजपा की बड़ी जीत का दावा किया है। अब यह दावा कितना सही साबित होता है, इसका जवाब मतगणना के दिन मिलेगा। यदि परिणाम उनके अनुमान के अनुरूप आता है तो उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता और मजबूत होगी, लेकिन उलट नतीजा उनके विरोधियों को हमला बोलने का मौका दे सकता है।
3 अगस्त पर टिकी निगाहें
दतिया उपचुनाव का अंतिम फैसला अब मतगणना के बाद सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव का असर सिर्फ विधानसभा की एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा। परिणाम यह भी बताएगा कि मध्य प्रदेश की भाजपा राजनीति में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अगली भूमिका कितनी प्रभावशाली रहने वाली है।

