दतिया उपचुनाव में कम मतदान के बीच ''दादा फैक्टर'' बना सबसे बड़ा सवाल, क्या नरोत्तम का टिकट काटना BJP को पड़ेगा भारी?
Thursday, Jul 30, 2026-01:36 PM (IST)
दतिया। मध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान जारी है, लेकिन इस बार मुकाबला सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच नहीं दिख रहा। चुनावी चर्चा का केंद्र पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा भी बने हुए हैं। टिकट कटने के बाद पहली बार हो रहे इस चुनाव में हर किसी की नजर इस बात पर है कि क्या उनका प्रभाव मतदान और नतीजों पर असर डालेगा।सुबह से मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहा। शुरुआती घंटों में मतदाताओं का उत्साह दिखाई दिया, लेकिन बाद में मतदान की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी पड़ गई। सुबह 9 बजे तक 12.94 प्रतिशत, 10 बजे तक 16.33 प्रतिशत और 11 बजे तक करीब 34.31 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कम मतदान प्रतिशत को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बीजेपी को विकास के मुद्दे पर भरोसा
भारतीय जनता पार्टी ने इस उपचुनाव में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। टिकट बदलने के फैसले के बाद पार्टी के भीतर असंतोष भी सामने आया था, हालांकि चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में वरिष्ठ नेताओं ने संगठन को एकजुट दिखाने की कोशिश की। मतदान के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने विश्वास जताते हुए कहा कि जनता विकास और स्थिरता के पक्ष में मतदान कर रही है तथा उन्हें पूर्ण भरोसा है कि भाजपा को जनसमर्थन मिलेगा।
कांग्रेस ने जताया बदलाव का भरोसा
दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह भी अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिखाई दिए। मतदान करने के बाद उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में बदलाव का माहौल है और जनता इस बार अलग फैसला लेने जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें जनता के व्यापक समर्थन का भरोसा है।
नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर सबसे ज्यादा चर्चा
इस उपचुनाव की सबसे खास बात यह रही कि चुनावी चर्चा में उम्मीदवारों के साथ-साथ पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम लगातार बना हुआ है। टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों की प्रतिक्रिया और चुनाव प्रचार के दौरान उनका भावुक संदेश राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय रहा।
मतदान के दिन मीडिया से बातचीत में नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विपक्ष पहले से ही हार की आशंका में ऐसे बयान दे रहा है। वहीं कम मतदान प्रतिशत पर उन्होंने कहा कि क्षेत्र में गर्मी और उमस अधिक है तथा दोपहर बाद विशेषकर महिला मतदाताओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
कम मतदान किसके पक्ष में जाएगा?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो दतिया में मतदान प्रतिशत का अंतिम आंकड़ा चुनावी परिणाम की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि मतदान अपेक्षा से कम रहता है या अंतिम समय में तेजी आती है, तो दोनों दल इसे अपने-अपने पक्ष में मान रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का संगठनात्मक वोट बैंक भारी पड़ता है या कांग्रेस बदलाव की उम्मीद को वोटों में बदलने में सफल रहती है।
3 अगस्त को मिलेगा जवाब
दतिया उपचुनाव अब केवल सत्ता और विपक्ष की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं रह गया है। इस चुनाव ने एक नया राजनीतिक विमर्श भी खड़ा कर दिया है—क्या 'दादा फैक्टर' भाजपा के लिए मजबूती बनेगा या चुनौती? इसका अंतिम जवाब मतगणना के दिन 3 अगस्त को सामने आएगा, जब जनता का फैसला सभी राजनीतिक दावों की सच्चाई तय करेगा।

