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कर्ज अदायगी में चूक से 55 हजार किसान डिफाल्टर! नहीं ले सकेंगे सहकारी समितियों से मदद, खरीफ पर संकट

Thursday, Apr 23, 2026-02:47 PM (IST)

बैतूल : मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में सहकारी बैंक से लिया गया ऋण समय पर जमा नहीं कर पाने के कारण 55 हजार से अधिक किसान डिफाल्टर हो गए हैं। इससे आगामी खरीफ सीजन में इन किसानों को खाद-बीज और नए ऋण की सुविधा मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा, वहीं ब्याज का अतिरिक्त बोझ भी बढ़ेगा। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा लगभग एक लाख 33 हजार किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज योजना के तहत करीब 703 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया था। इस ऋण की अदायगी की अंतिम तिथि 28 मार्च 2026 तय की गई थी, जिसके भीतर भुगतान करने पर ब्याज में पूरी छूट मिलती। वसूली के लिए बैंक प्रशासन ने विशेष अभियान चलाकर गांव-गांव संपर्क भी किया। इसके बावजूद निर्धारित समय सीमा तक केवल 358 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी, जो करीब 77 हजार 500 किसानों ने जमा कराई। शेष 55 हजार से अधिक किसान भुगतान नहीं कर सके और डिफाल्टर घोषित हो गए, जिससे वे शून्य प्रतिशत ब्याज योजना के लाभ से वंचित हो गए।

नियमों के अनुसार, अब इन किसानों को ऋण लेने की तिथि से 28 मार्च तक सात प्रतिशत तथा इसके बाद 12 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा, जिससे उन पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। डिफाल्टर होने के कारण किसानों को सहकारी समितियों से नया ऋण नहीं मिलेगा। साथ ही खाद, बीज और कीटनाशक जैसी सुविधाएं भी प्रभावित होंगी, जिससे किसानों को बाजार से नकद भुगतान कर महंगे दामों पर कृषि सामग्री खरीदनी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर फसल विक्रय पर भी पड़ सकता है। किसान समर्थन मूल्य या भावांतर योजना के तहत उपज बेचने से बच सकते हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में भुगतान राशि बैंक द्वारा ऋण वसूली में समायोजित की जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि जिले में पहले से ही गेहूं खरीदी में विलंब और ई-टोकन प्रणाली से खाद वितरण में आ रही समस्याओं के चलते किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय पर खरीदी होती, तो वे ऋण अदायगी कर पाते।


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Content Writer

meena

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