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नियमितीकरण की मांग को लेकर धरने का 72वां दिन, महिला अतिथि विद्वान ने मुंडन कराकर जताया विरोध

Wednesday, Feb 19, 2020-04:30 PM (IST)

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नियमितीकरण की मांग को लेकर शाहजहांनी पार्क में 72 दिन से धरने पर डटे अतिथि विद्वानों के आंदोलन में नया मोड़ आया। बुधवार को धरने पर बैठी एक महिला अतिथि विद्वान ने मुंडन करवाकर विरोध जताया। डॉ. शाहीन ने कहा कि सरकार के वचन पत्र में किए गए वादे कहां गए। अब हमारे लिए जीवन और मौत का मामला है, हमें जब तक लिखित आर्डर नहीं मिल जाता है। तब तक यहां से हटेंगे नहीं।

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जिस महिला ने मुंडन कराया है उसका नाम डॉ. शाहीन खान है। वह कटनी के पालू उमरिया शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी पढ़ाती हैं। अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ. देवराज सिंह ने बताया कि फिलहाल एक महिला अतिथि विद्वान ने आज 1 बजे मुंडन कराया है। अब 26 फरवरी को 4 महिलाएं और 4 मार्च को महिला और पुरुष मुंडन कराएंगे। मोर्चा के प्रवक्ता डॉ. आशीष पांडे ने बताया कि संगठन द्वारा 2 दिसंबर से छिंदवाड़ा से आंदोलन शुरू किया गया था। इस हिसाब से आंदाेलन के 90 दिन बीत चुके हैं। स्व. संजय कुमार की पत्नी लालसा देवी भी 3 दिन से अस्थि कलश लेकर धरने पर बैठी हैं। उन्होंने कहा हमें मुख्यमंत्री के आने का इंतजार है। जब तक वे नहीं आएंगे तब तक हम यहीं डटे रहेंगे।

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अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ. देवराज ने कहा कि सरकार के पास आईफा अवार्ड्स कराने के लिए पैसा है, फिल्मों को टैक्स फ्री करने के लिए पैसे हैं, लेकिन वचनपत्र में किए गए वादे को पूरा करने के लिए सरकार बार-बार वित्तीय संकट का हवाला दे रही है। राजधानी में 735 दिन के बाद फिर से ऐसा हुआ, जब शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ीं महिला कर्मचारियों ने मांगों के लिए इस तरीके से विरोध जाहिर किया है। इसके पहले 13 जनवरी 2018 को जंबूरी मैदान में धरना दे रही 4 महिला अध्यापकों ने मुंडन करवाकर सरकार को चुनौती दी थी। यह आंदोलन आजाद अध्यापक संघ ने किया था।

इस दौरान उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि महिला अतिथि विद्वानों को मैंने हर बार कहा है कि हम एक-एक को रिक्रूट करेंगे। पिछले 30 साल से पीएससी की वैकेंसी नहीं निकली है, लेकिन हमने 1700 शिक्षकों की भर्ती के लिए नौकरी निकाली। इसमें 600 शिक्षकों को भर्ती किया जा चुका है। अतिथि विद्वानों की बात है तो मैं इनके आंदोलन में गया था, वहां भी मैंने इन्हें कहा है कि एक भी अतिथि विद्वान बाहर नहीं होगा।


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Edited By

Jagdev Singh

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